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Delay अधिकारियों की टेबल पर अटकी ‘अनुकम्पा’, नौकरी पाने भटक रहे लोग

Delay अधिकारियों की टेबल पर अटकी ‘अनुकम्पा’, नौकरी पाने भटक रहे लोग

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जबलपुर. इंद्राना संकुल में अध्यापक पद पर पदस्थ अनुराग साहू का देहांत वर्ष 2015 में हो गया। अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए उनकी पत्नी ने विभाग में आवेदन दिया लेकिन 9 साल बाद भी अब तक कार्रवाई नहीं हो सकी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण उनकी पत्नी को आजीविका के लिए अपना घर छोडकऱ शहर में आकर छोटी-मोटी करने मजबूर होना पड़ा। शहर में काम कर गुजर बसर करने विवश हो गई है।

न्याय के लिए साल से चक्कर: आवेदनों का निराकरण नहीं

104 मामले लंबित

जिले में अनुराग साहू का परिवार ही अकेले ऐसी समस्या से नहीं गुजर रहा। शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में चल रही लापरवाही ने कई परिवारों को वर्षों से परेशानी में डाल रखा है। करीब 104 मामले सालों से लंबित हैंलेकिन अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी है।

आश्रित काट रहे विभाग के चक्कर

वर्षों से नियुक्ति की आस में पीड़ित आवेदक विभाग और अधिकारियों के चक्कर काटते थक चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान होता नहीं दिख रहा। आवेदन किए जाने के बाद भी मामलों का निराकरण नहीं होने से पीड़ितों की भी परेशानी बढ़ती जा रही है।

केस एक
उडना संकुल में एचएम के पद पर पदस्थ जॉन प्रकाश की 2020 में मृत्यु हो गई। उनकी बेटी कंचन ने अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए विभाग में आवेदन दिया। विभाग ने हवाला दिया कि पद नहीं है जिसके कारण नियुक्ति दे पाना संभव नहीं है। अब तक कोई निराकरण नहीं हो सका।

केस दो

मृतक ममता चौधरी सहायक अध्यापक की वर्ष 2018 में मौत हो गई। उनकी बेटी सिमरन ने शिक्षा विभाग में आवेदन किया। छह साल बाद भी प्रकरण पर कार्रवाई नही हो सकी। सिमरन को सिर्फ आश्वासन मिल रहा है।

केस तीन

प्रदीप जैसवाल अध्यापक का 2018 में देहांत हो गया। उनकी पत्नी रेनू को छह साल बाद भी अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल सकी है। अब उनका परिवार भी आर्थिक और मानसिंक संकट से गुजर रहा है।

पदों को लेकर झंझट

जानकारों के अनुसार जिले मे 131 लोगों ने अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए दरखास्त लगाई थी। इसमें से केवल 27 मामलों में ही विभाग कार्रवाई कर सका है। विभाग द्वारा दलील दी गई कि शासन स्तर से पद न आने के कारण नियुक्ति की प्रक्रिया नहीं हो पा रही है।

योग्यता में कमी भी कारण

कई आवेदक ऐसे हैं जो निर्धारित क्राईटेरिया को पूरा नहीं कर पा रहे हैं तो कई बार पीड़ित भी दूर-दराज अथवा दूसरा पद लेना नहीं चाहते जिसके कारण मामलों पर निर्णय अटके हुए हैं। अनुकंपा नियुक्ति में नए प्रावधान भी अड़चनें पैदा कर रहे हैं। बारहवीं में पचास फीसदी अंक, पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना, डीएड और बीएड कीे कक्षा अनुसार अनिवार्यता जैसे नियमों के कारण भी उम्मीदवार आगे नहीं आ पा रहे हैं।

अनुकंपा नियुक्ति मामलों में प्रक्रिया विचाराधीन है। पद न होने के कारण इसमें अड़चने आ रही हैं। हमने विभाग से विभिन्न श्रेणी के पदों की मांग की है ताकि उन्हें एडजस्ट किया जा सके।

जीएस सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी