13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हाईकोर्ट का आदेश दो महीने में हटाओ ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, भेड़ाघाट किनारे बने मकान दुकान

हाईकोर्ट का आदेश दो महीने में हटाओ ग्वारीघाट, तिलवाराघाट, भेड़ाघाट किनारे बने मकान दुकान

2 min read
Google source verification
Gwarighat, Tilwara Ghat, Bhedaghat constructions removing in 2 months: HC

Gwarighat, Tilwara Ghat, Bhedaghat constructions removing in 2 months: HC

जबलपुर/ हाईकोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर, एसपी और नगर निगम सीइओ को तिलवाराघाट, ग्वारीघाट व भेड़ाघाट में नर्मदा के प्रतिबंधित दायरे में एक अक्टूबर 2008 के बाद हुए निर्माण दो माह में हटाने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिए अधिवक्ता मनोज शर्मा को कोर्ट आयुक्त नियुक्त किया है। अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी। बुधवार को सरकार की ओर से एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश की गई।

हाईकोर्ट का सख्त रुख : हकीकत का आकलन करने के लिए कोर्ट आयुक्त नियुक्त किया
नर्मदा के प्रतिबंधित दायरे में 2008 के बाद हुए निर्माण दो माह में हटाओ

अवैध निर्माण की सूची पेश
सरकार की ओर से चार्ट प्रस्तुत कर बताया गया कि शहर से सटे नर्मदा नदी के ग्वारीघाट, तिलवाराघाट व भेडाघाट में 300 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में 1 अक्टूबर 2008 की कट ऑफ डेट के पूर्व 260 निजी, 572 आवासीय व 212 सरकारी भवन बने। जबकि 1 अक्टूबर 2008 के बाद 41 निजी, 3 आवासीय और 31 सरकारी भवन बनाए गए। कोर्ट की ओर से कट ऑफ डेट निर्धारित करने का आधार और इस तारीख के बाद हुए निर्माण न हटाने का कारण पूछा गया। महाधिवक्ता पीके कौरव ने इसके लिए सर्वे रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने कहा, पिछले कई आदेशों के बावजूद कट ऑफ डेट के बाद हुए निर्माण भी नहीं हटाए जा सकने के लिए कोई सफाई नहीं स्वीकार की जा सकती। कोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर, एसपी और नगर निगम सीइओ को निर्देश दिए कि वे दो माह के अंदर सभी सम्बंधितों को सुनवाई का अवसर देकर विधि अनुसार प्रक्रिया के बाद संयुक्त रूप से कार्रवाई कर 1 अक्टूबर 2008 के बाद हुए निर्माणों को हटाना सुनिश्चित करें। इसके पूर्व क्षेत्र की वीडियोग्राफी कर कोर्ट में पेश की जाए, ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी ऐसे निर्माण को सुनिश्चित किया जा सके।

एक्शन टेकन रिपोर्ट में बताया गया कि 30 मई, 2019 को जारी हाईकोर्ट के आदेश के तारतम्य में तहसीलदार, आरआई और पटवारी की टीम ने विवादित स्थल का सर्वे किया। 1 जून, 2019 को पेश की गई टीम की रिपोर्ट के अनुसार दयोदय ट्रस्ट की ओर से नर्मदा के 300 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में कोई निर्माण नहीं किया जा रहा है।

अपना मत प्रस्तुत करें
कोर्ट ने इस मामले में अधिवक्ता मनोज शर्मा को कोर्ट आयुक्त नियुक्त किया है। कहा गया कि कोर्ट आयुक्त ग्वारीघाट, तिलवाराघाट व भेड़ाघाट में नर्मदा नदी के 300 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में निरीक्षण कर जमीनी हकीकत के बारे में अपना मत प्रस्तुत करें। यदि कोई अवैध निर्माण या रेत उत्खनन हो रहा हो तो अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपें। नगर निगम को अधिवक्ता शर्मा को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।