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यहां 95 फीसदी ज्वेलर्स भारतीय मानक ब्यूरो से पंजीकृत नहीं, आप भी जाने 

सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क की अनिवार्यता की कवायद को लेकर सराफा कारोबारियों में हलचल है। नए साल से यह कानून लागू हो सकता है

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reetesh pyasi

Dec 29, 2016

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जबलपुर। सोने के आभूषणों पर हॉलमार्क की अनिवार्यता की कवायद को लेकर सराफा कारोबारियों में भी हलचल है। नए साल से यह कानून लागू हो सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई रूल्स और रेगुलेशन नहीं आए हैं। ज्वेलर्स का कहना है कि जिले में इतने हॉलमार्क सेंटर नहीं हैं जिनमें सभी सोने के आभूषणों की हॉलमार्र्किंग की जा सके। अभी 95 फीसदी ज्वेलर्स भारतीय मानक ब्यूरो से पंजीकृत नहीं है। अभी सभी ज्वेलर्स के पास बिना हॉलमार्क वाले जेवर हैं। नियम आने पर इनकी गलाई करवाकर फिर से तय किए गए कैरेट के अनुसार गहने बनाने में परेशानी उठानी पड़ सकती है।

इसलिए जरूरी

हॉलमार्क में सोना 23, 22, 21, 18, 17, 14 और 9 कैरट में बिकता है। सामान्य आभूषणों में एेसा कोई पैमाना नहीं होता। मौखिक रूप से ही दुकानदार खरीददार को बताता है। कई बार इसकी शुद्धता पर सवाल खड़ा हो जाता है। इसलिए सरकार हॉलमार्क को अनिवार्य करना चाहती है।

यह है हॉलमार्किंग

हॉलमार्क दरअसल सोने की गुणवत्ता का पैमाना है। यह एक चिन्ह है जो आभूषणों पर लगाया जाता है। हॉलमार्क वाले आभूषण अंतरराष्ट्रीय मानक के वाले होते हैं। इसमें पांच प्रकार की चिन्ह होते हैं। इसमें ग्रेड के अलावा हॉलमार्क सेंटर और विक्रेता का चिन्ह भी शामिल होता है।

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