24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

हलषष्ठी पर्व : बाहर से चर्च अंदर से मंदिर, अनूठा है पन्ना का बलदाऊ मंदिर

140 साल पहले राजा रुद्र प्रताप सिंह ने कराया था निर्माण,हलषष्ठी पर्व पर होती है विशेष पूजा,  

2 min read
Google source verification

image

Ajay Khare

Aug 22, 2016

jabalpur news in hindi, halsasthi, baldau temple o

baldau mandir panna

अजय खरे। हलषष्ठी पर्व देश में धूमधाम से मनाया जाता है, बुंदेलखंड और महाकोशल में इसे हलछट या हरछट के नाम से मनाते हैं। इस अवसर पर महिलाएं व्रत रखती हैं। वैसे यह पर्व श्रीकृष्ण के भाई बलदाऊ को समर्पित है। श्रीकृष्ण के जहां देश भर में अनेक मंदिर हैं वहीं बलदाऊ के बहुत कम मंदिर देखने को मिलते हैं। मध्यप्रदेश के पन्ना जिला मुख्यालय पर स्थित बलदाऊ का अद्वितीय मंदिर और प्रतिमा दर्शनीय हैं। यह मंदिर संपूर्ण विश्व में इस मायने में अद्वितीय है कि बाहर से यह चर्च की शैली में बना है तो अंदर श्रीकृष्ण की सोलह कलाओं के दर्शन होते हैं। कहा जाता है कि यह इटली के एक चर्च की प्रतिकृति है।

jabalpur news in hindi

श्रीकृष्ण की 16 कलाओं पर आधारित है मंदिर

मंदिर का निर्माण करीब 140 साल पहले तत्कालीन पन्ना नरेश रुद्र प्रताप सिंह ने कराया था। कहा जाता है कि कृषि कार्य में उनकी विशेष रुचि थी, जिसकी वजह से उन्होंने हल धारण किए बलदाऊ के भव्य मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर कई विशेषताओं से परिपूर्ण है। इसकी वास्तु शैली पूर्व और पश्चिम के धर्म का संगम कराती प्रतीत होती है। बाहर से देखने पर मंदिर किसी शानदार और विशाल चर्च की तरह नजर आता है जबकि अंदर से एक भव्य मंदिर का रूप लिए है। इस मंदिर के निर्माण में भगवान श्रीकृष्ण की सोलह कलाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। मंदिर में प्रवेश करने के लिए 16 सीढिय़ां हैं अंदर 16 मंडप और 16 झरोखे हैं। मंदिर 16 विशाल स्तंभों पर टिका है।

jabalpur news in hindi


मनोहारी है बलदाऊ की शालिग्रामी प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में बलदाऊ की विशाल शालिग्रामी प्रतिमा है जो अत्यंत आकर्षक और मनोहारी है। वैसे सभी त्योहारों पर यहां विशेष पूजा अर्चना होती है पर हलषष्ठी पर्व की बात ही कुछ अलग होती है। देव बलदाऊ को समर्पित इस पर्व पर पूजा अर्चना करने जिला भर से लोग आते हैं। मंदिर प्रांगण श्रद्धालुओं की उपस्थिति से भर जाता है। परंपरागत रूप से राजपरिवार के लोग इस दिन यहां पूजा करने आते हैं।

शेषनाग का अवतार
पौराणिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग मेंं लक्ष्मणजी ने बलदाऊ के रूप में अवतार लिया था। उनका एक अवतार शेषनाग के रूप में भी माना गया है। बलदाऊ मंदिर में स्थापित मूर्ति शेषनाग की छत्रछाया वाली है। माना जाता है कि संपूर्ण देश में बलदाऊ की यह अद्वितीय मूर्ति है। देश भर में न तो उनका कहीं ऐसा मंदिर है और न ही ऐसी मूर्ति देखने को मिलती है।

ये भी पढ़ें

image