श्रीमद्भागवत में लिखा है कि यज्ञ, अनुष्ठान, पूजा, व्रत आदि में जो कमी रह जाती है वह इस हरि नाम मात्र के जाप से पूर्ण हो जाती है। "हरि नाम" अनुष्ठान, पूजा, व्रत से श्रेष्ठ है। ,रामायण, महाभारत, वेद, पुराण, गीता सभी में "हरि नाम" का गुणगान किया गया है।