
Hariyali Amavasya
Hariyali Amavasya : सावन की अमावस्या तिथि को हरियाली अमावस्या मनाई जाती है। इस दिन लोग पूजा पाठ, पितृ तर्पण, दान के साथ ही पेड़-पौधे लगाते हैं और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लेते हैं। इसे पर्यावरण संरक्षण और हरियाली के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। इस वर्ष 04 अगस्त को हरियाली अमावस्या है।
ज्योतिषियों का कहना है कि इस बार हरियाली अमावस्या पर दशकों बाद रवि पुष्य व दुर्लभ शिववास योग सहित कई मंगलकारी योगों का संयोग बन रहा है। इस संयोग में हरियाली अमावस्या पर पूजन अति शुभकारी माना जा रहा है। वहीं अमावस्या तिथि के चलते इस दिन पितृ तर्पण भी किया जाएगा। इस वर्ष हरियाली अमावस्या पर चार शुभ योग बन रहे हैं।
ज्योतिर्विद शुक्ला के अनुसार हरियाली अमावस्या पर तीस वर्ष बाद सिद्धि योग, रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। सिद्धि योग चार अगस्त को प्रात:काल से लेकर सुबह 10:38 तक, रवि पुष्य योग प्रात: 05:44 से दोपहर 01:26 बजे तक, सर्वार्थ सिद्धि योग प्रात: 5: 44 बजे से दोपहर 1: 26 बजे तक व रवि पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर दोपहर 01:26 बजे तक रहेगा। उसके बाद से अश्लेषा नक्षत्र है। हरियाली अमावस्या के दिन पूजन के लिए शुभ ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:20 से प्रात: 05:02 तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से दोपहर 12:54 तक व हरियाली अमावस्या पर स्नान दान का शुभ समय प्रात: 05:44 से दोपहर 01:26 तक है।
हिंदू परपरा में पेड़-पौधों को भगवान के रूप में भी दर्शाया गया है और लोग हरियाली अमावस्या के दौरान उनकी पूजा करते हैं। इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा करने की प्रथा भी है। हरियाली अमावस्या के दिन पेड़-पौधे लगाना बहुत शुभ माना जाता है। विद्वानों का कहना है हरियाली अमावस्या के दिन पितरों को तर्पण देना और दान-पुण्य करना भी बहुत उपयोगी होता है।
ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला ने बताया कि सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि आरंभ: तीन अगस्त की दोपहर: 03: 50 बजे से होगा। अमावस्या तिथि चार अगस्त की सायं 4: 42 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार हरियाली अमावस्या का पर्व चार अगस्त को मनाया जाएगा।
Updated on:
01 Aug 2024 03:04 pm
Published on:
01 Aug 2024 02:48 pm
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