
Jabalpur. People are also helping the townspeople by risking their lives during the Corona crisis.
जबलपुर. कोरोना संकट के दौर में अपनी जान को जोखिम में डालकर भी लोग शहरवासियों की मदद कर रहे हैं। इसमें हमारे पड़ोस के आटा चक्की संचालक भी शामिल हैं। लॉकडाउन के लम्बे पीरियड में लोगों को खाद्यान्न के साथ आटे की भी जरूरत है। ऐसे में चक्की संचालक आगे आकर मदद कर रहे हैं। लॉकडाउन के कारण सीमित समय तक ही आटा चक्की खोलने की अनुमति है। ऐसे में सभी को तुरंत आटा नहीं मिल पाता। इसके लिए भी चक्की संचालकों ने व्यवस्था की है। गेहूं की पिसाई होने पर वे मोबाइल पर सूचना देते हैं।
ज्यादातर घरों में चक्की का आटा ही इस्तेमाल होता है। कम लोग ही बाजार से रेडीमेड आटा खरीदना पसंद करते हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण स्थितियां विपरीत हो गई हैं। आटा चक्की संचालकों ने बताया कि ग्राहकों की संख्या पहले की तुलना में कम हुई है, लेकिन जो भी ग्राहक पहुंचता उसे वह निराश नहीं लौटने देते। चक्की संचालक स्वयं को और चक्की को सेनिटाइज कर गेहूं पीसते हैं।
सभी को लॉकडाउन का पालन करना है। सोशल डिस्टेंसिंग भी जरूरी है। परिवार के लोग व्यवस्थाएं बनाने में मदद करते हैं। पड़ोस का कोई व्यक्ति गेहूं लेकर आता है तो समय होने के बाद भी पिसाई करते हैं।
गुड्डा चक्रवर्ती, चिकनी कुआं, देवताल
लम्बे समय से आटा चक्की का संचालन कर रहा हूं। लॉकडाउन के कारण बाजार में कई चीजें नहीं मिल रही हैं। कुछ लोग पैकेट वाले आटे की जगह चक्की में पिसा आटा ही पसंद करते हैं। इसलिए लॉकडाउन में छूट मिलते ही गेहूं पीसते हैं।
विवेक साहू, दमोहनाका रोड
चक्की में गेहूं, दाल और चावल की पिसाई करते हैं। सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए चक्की के सामने निशान बनाया है। लोगों को भी एक-दूसरे से दूरी बनाने के लिए जागरूक करते हैं। जोखिम हमें भी है, लेकिन यह ऐसा काम है, जिसे बंद नहीं कर सकते।
अनिल दुबे, आनंदकुंज चौराहा, गढ़ा
कोरोना के संक्रमण से बचने के लिए खुद भी सावधानी रखते हैं। लोगों को भी जागरूक करते हैं। अपनी सेवाएं देने में कोई कमी नहीं रख रहे हैं। कई संस्थाएं भी गेहूं पिसाने के लिए आ रही हैं। उन्हें भी समय पर आटा उपलब्ध करा रहे हैं।
हरीलखन सिंह राजपूत, जयराम चौक, रांझी
Published on:
16 Apr 2020 11:56 am
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