यहां शहडोल, बुढ़ार, धनपुरी व अमलाई के अलावा अनूपपुर, उमरिया सहित छत्तीसगढ़ से भी बापू के अनुयायी हर वर्ष बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। बापू घाट के नाम से प्रसिद्ध इस स्थल पर लोग भजन-कीर्तन के साथ उनके आदर्शों को याद करते हैं। इस परंपरा को संस्थापक सदस्य स्व. रामविलास राय की पत्नी शिव कुमारी, पुत्र अविनाश व कामाख्या राय ने आज भी जीवंत रखा है। इस परंपरा को बढ़ाने के लिए एसईसीएल (साउथ ईस्ट कोल फील्ड लिमिटेड कंपनी) ने भी महती भूमिका निभाई है।