
High Court: आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को आरक्षण अनारक्षित सीटों के अनुपात में ही मिलेगा। कुल पदों से इसकी गणना नहीं की जाएगी। यह अहम आदेश हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने दिया है। इसी के साथ रिक्त पदों के आधार पर 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस आरक्षण नहीं देने को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी गई। हाईकोर्ट ने कहा कि EWS कोटा अनारक्षित वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए है। इसका कोटा अनारक्षित वर्ग के लिए निर्धारित सीटों पर लागू होगा।
सामान्य वर्ग के लिए 2019 में केंद्र सरकार यह आरक्षण लेकर आई। यह उनके लिए है जो किसी भी श्रेणी के आरक्षण में नहीं आते हैं, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसके लिए अनारक्षित वर्ग के लोगों को प्रमाण-पत्र देना होता है। सामान्
याचिकाकर्ता अंकुश मिश्रा, पुष्पेन्द्र कुमार समेत अन्य ने याचिका लगाई थी। इसमें कहा था कि स्वास्थ्य विभाग में लैब टेक्नीशियन के 219 पदों के लिए प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड ने परीक्षा ली थी। ईडब्ल्यूएसवर्ग के लिए 10 प्रर्तिशत आरक्षण तय है। ऐसे में 22 पद आरक्षित होने चाहिए थे, लेकिन इस कोटे में सिर्फ चार लोगों को नियुक्ति दी गई।
-जिनके पास खेती की पांच एकड़ से कम जमीन हो।
-आवासीय घर 200 वर्ग मीटर या ज्यादा न हो।
-आवासीय घर 200 वर्ग मीटर से ज्यादा हो, लेकिन नगर पालिका क्षेत्र में न हो।
-परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपए से कम हो।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए ईडब्ल्यूएस कोटे का गणित भी समझाया। एकलपीठ ने पाया कि कुल 219 पदों में से 122 पद ओबीसी, 46 एसटी और १३ पद एसटी वर्ग के लिए तय थे। सामान्य वर्ग के लिए 38 पद निर्धारित थे। एकलपीठ ने आदेश में कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण सिर्फ सामान्य वर्ग के लिए है। सामान्य वर्ग के लिए तय संख्या के अनुसार 10 फीसदी आरक्षण ईडब्ल्यूएस वर्ग को दिया गया है। यह सही है।
Updated on:
08 May 2024 08:10 am
Published on:
08 May 2024 08:09 am
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