सेहत से खेल रहे 'नीम हकीमों पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जबाब

आयुर्वेद-होम्योपैथी की डिग्री लेकर क्लीनिक खोलकर एलोपैथी से कर रहे हैं इलाज

By: Hitendra Sharma

Published: 06 Dec 2020, 11:14 AM IST

जबलपुर. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि एलोपैथी से इलाज कर रहे अन्य पद्धति से प्रशिक्षित डॉक्टर्स (झोलाछाप) के क्या कार्रवाई की जा रही है? एक्टिंग चीफ जस्टिस संजय यादव और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने यह भी पूछा कि इन नीम हकीमों के इलाज पर लगाम लगाने के लिए सरकार के प्रस्तावित कदम क्या हैं? कोर्ट ने 4 जनवरी तक इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट मांगी। कोरोना के संकटकाल में ऐसे डॉक्टरों का जाल और तेजी से फैला है।

कई बार निर्देश, लेकिन ज्यादा कुछ नहीं हुआ

पूर्व में स्वास्थ्य विभाग ने जबलपुर पुलिस महानिरीक्षक को रिपोर्ट दी थी। इस पर महानिरीक्षक ने जबलपुर एसपी को निर्देश दिया था कि वे संबंधित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करें। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कमिश्नर और कलेक्टर ने भी झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन कुछ के खिलाफ ही एफ आई आर दर्ज की गई। आग्रह किया गया कि झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिक बंद कराई जाए। उनके प्रैक्टिस करने पर रोक लगाई जाए।

झोलाछाप के इलाज से नवजात की मौत

तेंदूखेड़ा. ग्राम मर्रावन इमलिया में सरस्वती गौंड (२४) को डिलेवरी के लिए तेंदूखेड़ा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आई थी। यहां जांच के बाद वह बरखंदा में झोलाछाप डॉक्टर के पास पहुंची। इस झोलाछाप के इलाज के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। तेंदुखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से उसे नरसिंहपुर और फिर जबलपुर रेफर किया गया। ऑपरेशन के बाद नवजात की मौत हो गई, जबकि सरस्वती की हालत गंभीर बनी हुई है।

लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन

साठिया कुआं जबलपुर के निवासी ऋषिकेश सराफ ने जनहित याचिका दायर की। कहा कि आयुर्वेद, होम्योपैथी और अन्य पद्धतियों से प्रशिक्षित 28 चिकित्सकों द्वारा एलोपैथी से इलाज करने की शिकायत की थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इनमें से 13 की जांच की और सिर्फ पांच के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया। कोई क्लीनिक सील नहीं किया गया। तर्क दिया कि कोरोना महामारी संक्रमण काल में भी ये झोलाछाप डॉक्टर बिना एलोपैथिक डिग्री के सर्दी खांसी बुखार जुकाम लक्षणों वाले मरीजों का एलोपैथिक दवाओं के जरिए इलाज कर रहे हैं। होम्योपैथी, आयुर्वेदिक या अन्य पद्धतियों से प्रशिक्षित डाक्टरों को क्लीनिक के लिए अपना पंजीयन कराना होता है। शर्त होती है कि वे जिस पद्धति में प्रशिक्षित है, उसी से इलाज करें, लेकिन वे एलोपैथी से इलाज शुरू कर देते हैं।

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