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एससीएसटी आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानें पूरा मामला

एससीएसटी आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

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Court sentenced to 20 years for rape accused in khandwa

Court sentenced to 20 years for rape accused in khandwa

जबलपुर . मप्र हाइकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एसटीएससी आयोग के अध्यक्ष पद पर फिलहाल नई नियुक्ति नहीं करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने आनंद अहिरवार की नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर कोर्ट की सिंगल बेंच की ओर से जारी स्थगन निरस्त करते हुए सिंगल बेंच में अहिरवार की याचिका लम्बित रहने तक मामले पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।

मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष आनंद अहिरवार और सदस्य प्रदीप अहिरवार ने याचिका के माध्यम से उनकी नियुक्तियों को निरस्त करने की प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी। हाइकोर्ट की सिंगल बेंच ने सरकार की ओर से नियुक्ति निरस्त किए जाने संबंधी आदेश पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी किया था। पूर्व महाधिवक्ता शशांक शेखर ने अहिरवार की ओर से तर्क दिया कि संवैधानिक पद पर की गई नियुक्ति को सिर्फ एक साधारण आदेश जारी करते हुए निरस्त किया गया, जो गलत है। अध्यक्ष और सदस्य को हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना पड़ता है। तर्क मंजूर कर सिंगल बेंच ने निरस्तगी के आदेश को स्थगित कर दिया था। इसके खिलाफ प्रदेश सरकार ने डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता पीके कौरव ने बताया कि अहिरवार को कार्यभार से मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया गया है। इस पर अधिवक्ता शशांक शेखर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सिंगल बेंच के समक्ष याचिकाकर्ता की नियुक्ति निरस्त करने के आदेश को चुनौती लम्बित है। ऐसे में कार्यभार से मुक्तकर आयोग के अध्यक्ष पद पर नई नियुक्ति करना अनुचित होगा। तर्क से सहमत होकर कोर्ट ने सिंगल बेंच का फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखते हुए नई नियुक्ति न करने का निर्देश देकर सरकार की अपील का पटाक्षेप कर दिया। कोर्ट ने ये निर्देश भी दिए है कि हाईकोर्ट की सिंगल बेंच जल्द से जल्द आनंद अहिरवार की याचिका पर सुनवाई पूरी करे।