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पुलिस का मानवीय चेहरा! भावुक कर देने वाली ऐसी तस्वीरें कम ही दिखती हैं

चरगवां हादसे के बाद घायलों को लेकर मेडिकल अस्पताल पहुंची थी पुलिस

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Human face of the police

Human face of the police

जबलपुर. पुलिस का जिक्र होते ही बड़े-बड़े मानवाधिकार कार्यकर्ता भी मुंह बिचका लेते हैं। आम से लेकर खास लोगों की नजर में भी पुलिस से जुड़े अनुभव शायद ही कभी अच्छे रहते हों। कहावतें कही जाती हैं कि अपने यहां की पुलिस किसी की नहीं होती। लेकिन, चरगवां हादसे में घायलों को मेडिकल में स्ट्रेचर नहीं मिले, तो पुलिस ने मानवीय जिम्मेदारी इतनी शिद्दत से निभाई कि देखने वाले भावुक हो गए। पीठ, गोद में घायलों को अपनेपन से ले जाते पुलिस वालों को देखना मामूली नहीं था। इस तरह की तस्वीरें देखने के लिए आंखें तरस जाती हैं। घायलों को वार्ड तक पहुंचाने वाले एएसआई संतोष सेन, एलआर पटेल, आरक्षक अशोक, राजेश, अंकित सहित अन्य जो भी थे, उन्हें घायलों और उनके परिजन की दुआएं मुबारक। आप सबने ऐसी मिसाल पेश की, जो भुलाए नहीं भूलेगी। आपने सबका दिल जीत लिया।
एएसआई संतोष के बारे में यह जानकर कोई भी भावुक हो सकता है कि उनका एक हाथ पूरी तरह से काम नहीं करता। वर्ष 2006 में नरसिंहपुर में उनपर एक बदमाश ने फायर किया था। इसके बाद से उनका दाहिना हाथ ठीक से काम नहीं करता। इसके बावजूद उन्होंने घायल मजूदरों को कंधे पर लादकर कैजुअल्टी तक पहुंचाया। इन तस्वीरों ने मेडिकल कॉलेज अस्पताल की व्यवस्थाओं और जिम्मेदारों के गाल पर तमाचा भी मारा है। वहां घायलों की चीख पुकार के बाद भी स्ट्रेचर नहीं मिले। मेडिकल का सिस्टम देखकर लोगों का खून खौल रहा था। अस्पताल प्रबंधन गाली खा रहा था। आलोचनाएं सुनने वाली पुलिस हीरो बनी हुई थी।