
human story in hindi
जबलपुर। वो जीवन से त्रस्त हो चुकी थी, मरने की चाहत भी मन में आ गई, लेकिन बेटे का मासूम चेहरा देखकर वो हिम्मत न हारी और संघर्ष में जुट गई। बेटे का पालन पोषण से लेकर नौकरी तक में उसने सारी उम्र इस भ्रम में गवां दी कि बेटा बुढ़ापे में उसे खुशियां देगा। किंतु उसका भ्रम , भ्रम ही रह गया। पूत कपूत निकल गया और मां को दर दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया। कभी गलियों की खाक छान रही है तो कभी स्टेशन पर फकीरों की जिंदगी में फांका कर रही है। ये एक मां की सच्ची कहानी है।
स्टेशन से लाकर विधिक सेवा प्राधिकरण ने दी कानूनी मदद
पति के ठुकराने के बाद जिस बेटे को मां ने अपना खून-पसीना एक करके पाल-पोस कर बड़ा किया, उसी बेटे ने बुढ़ापे में मां को घर से निकाल दिया। दर-दर भटकने के बाद वृद्धा रेलवे के मुसाफिर खाने में समय काटने पर विवश हो गई। यह जानकारी जब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों को मिली तो वृद्धा को प्राधिकरण के कार्यालय लाकर बेघर करने वाले बेटे के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के सचिव शरद भामकर ने बताया कि 69 वर्षीय बुर्जुग दीपाली मलिक भारती कॉलोनी, बिलपुरा, रांझी निवासी हैं। उन्हें उनके पति चन्द्रशेखर ने छोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने नर्सिंग का काम करके अपने बेटे सुब्रतो मलिक का पालन-पोषण किया। उसे अपने पैरों पर खड़ा होने लायक बनाया। इसके बावजूद शादी होने के बाद से बेटे का रवैया बदल गया। वह मां के साथ क्रूरता का व्यवहार करने लगा। 22 जनवरी 2019 को उसने मां को अपमानित कर घर से बाहर कर दिया। इस बात की शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में की गई। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
उम्रदराज होने से नहीं कर सकती काम-
उम्र अधिक हो जाने के कारण वृद्धा अब नर्सिंग का काम करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए रेलवे के मुसाफिर खाने में रहने पर बेबस हो गई। इसकी सूचना जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पास पहुंची। प्राधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेकर सीनियर सिटीजन अधिकरण एसडीएम रांझी के न्यायालय में महज 2 घंटे के भीतर पहुंचा दिया। माता-पिता व वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण व कल्याण अधिनियम-2007 की धारा-24 के तहत दांडिक कार्रवाई भी आरंभ कर दी गई।
Published on:
30 Jul 2019 10:51 am
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