पूर्ण लॉकडाउन में बरती गईं सावधानियों से इन रोगों में आई कमी

-लेकिन अनलॉक में आमजन से लेकर प्रशासन तक की लापरवाही दे सकती है दोहरा झटका

By: Ajay Chaturvedi

Published: 17 Nov 2020, 02:27 PM IST

जबलपुर. विशेषज्ञों का मत है कि कोरोना वायरस के संक्रमण ने आमजन से लेकर शासन-प्रशासन तक को काफी सचते किया था। कई मुद्दों पर खास सावधानियां बरती गईँ। इनका सबसे अच्छा परिणाम यह रहा कि कोरोना से इतर कई अन्य बीमारियों से इंसान बचा रहा। लेकिन अनलॉक में फिर से हर कोई असावधान हो गया। लोग पुनः वो सारी असावधानियां बरतने लगे हैं। इससे दोहरा झटका लग सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर मार्च से जुलाई तक के काल को देखें तो हर कोई स्वच्छता के प्रति काफी संजीदा रहा। घर आंगन हो या हर वो वस्तु जिसका दैनिक जीवन में इस्तेमाल होता है उसे हर किसी ने साफ रखा। घरों में झाड़ू-पोछा तो लगा ही साथ ही सेनेटाइजेशन भी होता रहा। इसी तरह चश्मा, घड़ी, मोबाइल, लैपटॉप आदि को भी बराबर साफ किया गया। सेनेटाइज किया गया। कहीं भी पानी नहीं लगने दिया गया। इससे मच्छरों के पनपने का उस तरह से मौका नहीं मिला जो आम तौर पर होता रहा है। इससे मच्छर जनति रोग जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि बीमारियां अपेक्षाकृत कम हुईँ। इसे कोरोना के गुड इफेक्ट के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन अब जिस तरह से फिर से असावधानी बरती जाने लगी है उससे कोरोना संक्रमण भी बढ़ सकता है और अन्य मच्छरजनित बीमारियां भी अटैक कर सकती हैं। ऐसे में डॉक्टरों की सलाह है कि लॉकडाउन की ही भांति स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाय। थोड़ी सी असावधानी से दोहरा झटका लग सकता है।

ये सावधानी आम इंसान के साथ शासन प्रशासन स्तर से भी अपेक्षित है। खास तौर पर नगर निगम, नगर पालिका परिषद, टाउन एरिया, जिला पंचायत प्रशासन को विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है। नाले-नालियां बराबर साफ होती रहें। कहीं जलजमाव न हो। कीटनाशकों का छिड़काव जारी रहना चाहिए। फागिंग भी जरूरी है। इन सावधानियों को अपना कर समाज को स्वस्थ रखा जा सकता है।

अगर जबलपुर की ही बात करें तो सरकारी आंकड़े दर्शाते हैं कि लॉकडाउन पीरियड की सावधानियों को चलते इस वर्ष मच्छरजनित बीमारियों में 80 फीसद की कमी आई है जो स्वस्थ समाज के लिए बेहतर उदाहरण है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2019 में जनवरी से दिसंबर के बीच मच्छरजनित बीमारियों से पीड़ित होने वालों की संख्या जहां 726 रही वहीं 2020 में अब तक महज 91 लोग ही मच्छरजनित बीमारियों के शिकार हुए।

बीते पांच सालों में मच्छरजनित रोग

वर्ष- मलेरिया- डेंगू- चिकुनगुनिया
2015- 374- 41- 5
2016- 374- 17- 10
2017- 316- 130- 81
2018- 230- 825- 1543
2019- 94- 393- 239
2020 (अक्टूबर तक)- 28- 31- 32

लेकिन अनलॉक के इस पांचवें संस्करण में नवंबर में मच्छरों का हमला तेज हो गया है। इस दौरान शहरी सीमा में नगर निगम की फागिंग मशीनें नजर नहीं आ रही हैं। नाले नालियों में कीटनाशक का छि.डकाव भी बंद है। इन दिनों सैनिटाइजर के उपयोग में भी कमी आई है जिसके कारण मच्छरजनित बीमारियों के तेजी से बढने की आशंका बन गई है।

"कोरोना महामारी के दौरान निश्चित ही मच्छरजनित रोगों का खतरा कम हुआ है। बीते पांच वर्ष के मुकाबले 2020 में मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया के सबसे कम मरीज सामने आए हैं। ऐसा लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता के चलते संभव हो सका है।"-अजय कुरील, जिला मलेरिया अधिकारी

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