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ऐतिहासिक मंदिरों की सुरक्षा नहीं कर सकते तो सन्तों को सौंप दो

जबलपुर जिले के पुरातात्विक महत्व के ऐतिहासिक मन्दिरों की दुर्दशा पर सन्तों ने इस सम्बंध में 'पत्रिका' में कैग (कंट्रोलर अकॉन्टेन्ट जनरल) की रिपोर्ट के हवाले से प्रकाशित खबर पर पुरातत्व विभाग के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।साफ कहा कि 40-40 वर्ष बाद भी पुरातत्व विभाग इन मंदिरों को संरक्षित नहीं कर सका है, तो यह सरकारी तंत्र की असफलता है। सन्तों ने कहा कि सरकारी तंत्र यदि इन मंदिरों का संरक्षण नहीं कर सकता, तो इन्हें सन्तवृन्द को सौंप दिया जाए। वे इनका संरक्षण और विकास करवा लेंगे।

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स्वामी गिरीशानन्द सरस्वती, साकेतधाम पीठाधीश्वर

स्वामी गिरीशानन्द सरस्वती, साकेतधाम पीठाधीश्वर

- कैग की रिपोर्ट में बताई गई गड़बड़ियों पर आक्रोशित हुए संस्कारधानी के संत, जताया विरोध
-कहा-पुरातत्व विभाग नहीं कर रहा जिम्मेदारी का निर्वहन
जबलपुर।
जबलपुर जिले के पुरातात्विक महत्व के ऐतिहासिक मन्दिरों की दुर्दशा पर संस्कारधानी के सन्तवृन्द में आक्रोश है। सन्तों ने इस सम्बंध में 'पत्रिका' में कैग (कंट्रोलर अकॉन्टेन्ट जनरल) की रिपोर्ट के हवाले से प्रकाशित खबर पर पुरातत्व विभाग के खिलाफ तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सन्तजनों ने साफ कहा कि 40-40 वर्ष बाद भी पुरातत्व विभाग इन मंदिरों को संरक्षित नहीं कर सका है, तो यह सरकारी तंत्र की असफलता है। सन्तों ने कहा कि सरकारी तंत्र यदि इन मंदिरों का संरक्षण नहीं कर सकता, तो इन्हें सन्तवृन्द को सौंप दिया जाए। वे इनका संरक्षण और विकास करवा लेंगे।

उल्लेखनीय है कि कैग ने 13 मार्च 2023 को जारी अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया था कि जिले की मझौली तहसील मुख्यालय स्थित विष्णु वराह मन्दिर में अतिक्रमण पसरा है। संस्कारधानी के गढ़ा पुरवा स्थित मालादेवी मन्दिर, आधारताल के मुड़िया शिव मन्दिर व लम्हेटाघाट के राधाकृष्ण मन्दिर के संरक्षण की दिशा में कोई भी कदम न उठाने पर भी कैग ने आपत्ति जताई थी। पत्रिका ने यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की थी।

इन्होंने कहा-
सन्तजन उठाएंगे आवाज-
संरक्षित मंदिरों के अतिक्रमण हटाकर सरकार को इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। मठ मंदिरों की सुरक्षा के लिए तो सरकार ने भी आश्वस्त किया है। पुरातत्व विभाग को अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अतिशीघ्र माला देवी, मुड़िया शिव व राधाकृष्ण मंदिर का संरक्षण करना चाहिए। ऐतिहासिक विष्णु वराह का मन्दिर देश मे इकलौता विष्णु वराह का इतना प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में अतिक्रमण चिंता का विषय है। यदि सरकार जल्द ही इन मंदिरों के संरक्षण व अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में कार्य नहीं करेगी, तो सन्तजन आगे आकर यह कार्य करेगा। यदि सरकार इन मंदिरों के संरक्षण में असमर्थ है तो इन्हें सन्तों की समिति बनाकर सौंप दिया जाए।
-स्वामी गिरीशानन्द सरस्वती, साकेतधाम पीठाधीश्वर
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जबलपुर शहर ऐतिहासिक , पुरातात्विक महत्‍व, धार्मिक, आध्‍यात्मिक और सांस्‍कृतिक परम्‍पराओं की दृष्टि से अत्‍यंत प्राचीन नगरी है। नर्मदा तटीय क्षेत्र धार्मिक एवं आध्‍यात्मिक साधना व यज्ञादि अनुष्‍ठानों के कारण सनातनी जीवन शैली को परिपुष्‍ट करता है। युगों-युगों से स्‍थापित महत्‍वपूर्ण स्थलों का संरक्षण ब्रिटिश शासकों के काल में भी होता रहा है। स्‍वतंत्र भारत में तो देश और प्रदेश के शासकों द्वारा ऐसे स्‍थानों का संरक्षण व संवर्द्धन किया जाना उनका विशेष दायित्‍व है। मैं वरिष्‍ठ अधिकारियों से मॉंग करता हूँ कि जबलपुर और उसके आसपास के ऐतिहासिक, पुरातात्विक महत्‍व के मंदिरों को संरक्षित किया जाए। उन्‍हें उपेक्षा का शिकार होने से तथा उनसे संबद्ध भूमि-भवन व अन्‍य प्रकार की सम्‍पत्ति का दुरूपयोग होने से बचायें। इस सम्बंध में मैं संस्‍कारधानी के संतों के स्‍वर में अपना स्‍वर सम्मिलित कर संतों की भावना का आदर करता हूँ ।
-स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरि, उपाध्यक्ष, गौ संवर्धन बोर्ड