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puc certificate सावधान! इनसे कराई है कार की प्रदूषण जांच तो कार्रवाई के लिए हो जाएं तैयार, पकड़ा दिया है फर्जी कागज

मॉडल रोड पर आरटीओ की कार्रवाईअवैध रूप से संचालित हो रहे थे पीयूसी सेंटर, लाइसेंस निलम्बित

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पर्यावरण की खातिर सभी पेट्रोल पम्पों पर खुलेंगे पीयूसी सेंटर, संचालक होंगे सम्मानित

पर्यावरण की खातिर सभी पेट्रोल पम्पों पर खुलेंगे पीयूसी सेंटर, संचालक होंगे सम्मानित

जबलपुर। मॉडल रोड पर दो पीयूसी सेंटर (प्रदूषण नियंत्रण जांच केन्द्र) अवैध रूप से संचालित हो रहे थे। इसका खुलासा मंगलवार को उस वक्त हुआ, जब आरटीओ संतोष पॉल और उनकी टीम ने औचक रूप से दोनों पीयूसी सेंटर्स की जांच की। जांच में पता चला कि छह माह पूर्व ही दोनों का लाइसेंस समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद उनका संचालन किया जा रहा था। आरटीओ ने तत्काल दोनों ही सेंटर्स के लाइसेंस निलंबित कर दिए।

आरटीओ पॉल ने बताया कि त्रिमूर्ति नगर दमोहनाका निवासी जयदीप तिवारी व शास्त्री नगर निवासी दीपांशु साहू को पीयूसी सेंटर आवंटित किए गए थे। दोनों के ही द्वारा मॉडल रोड इलाके में वाहनों की प्रदूषण जांच की जाती थी। मंगलवार को जब दोनों की जांच की गई, तो पता चला कि दोनों की लाइसेंस की तारीख छह माह पूर्व समाप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद दोनों के द्वारा वहां अवैध रूप से वाहनों की प्रदूषण नियंत्रण जांच की जा रही थी। दोनों ही पीयूसी सेंटर्स में रोजाना दर्जनों वाहनों की प्रदूषण की जांच की जाती थी, लेकिन सेंटर संचालकों द्वारा उनकी जानकारी दर्ज नहीं की जाती थी। आरटीओ पॉल ने जब दोनों संचालकों से रजिस्टर के बारे में पूछा, तो वे रजिस्टर पेश नहीं कर पाए।

सीधे हो कार्रवाई
परिवहन आयुक्त मुकेश जैन ने निर्देश जारी कर सभी पीयूसी सेंटर्स की जांच के आदेश दिए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कहीं कोई गड़बड़ी मिलती है तो उसे नोटिस जारी करने की बजाय सीधे उस पीयूसी सेंटर संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

शहर में कई सेंटर
जानकारी के अनुसार शहर में दर्जनों पीयूसी सेंटर संचालित हो रहे हैं। अधिकतर पीयूसी सेंटर्स में नियम विरुद्ध तरीके से वाहनों की प्रदूषण जांच की जाती है और उन्हें सर्टिफिकेट जारी कर दिए जाते हैं।
सेंटर्स की जांच

पीयूसी सेंटर्स की जांच की जा रही है। दो सेंटर के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। छह माह पूर्व उनका लाइसेंस समाप्त हो गया था। छह माह उनके द्वारा अवैध रूप से संचालन किया गया।
- संतोष पॉल, आरटीओ