16 मार्च 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

इस शहर की सुकून भरी हवा को लगी प्रदूषण की नजर

जबलपुर शहर में बढ़ते प्रदूषण से बढ़ रहा खतरा

3 min read
Google source verification
chambal river water supply by rajasthan government

chambal river water supply by rajasthan government

जबलपुर। हरियाली से घिरा जबलपुर शहर। इसकी पहचान स्वस्थ हवा, स्वच्छ जल और सुकून के लिए भी होती है। लेकिन, अब इसकी तस्वीर बदल रही है। जबलपुर शहर प्रदूषण के गम्भीर खतरे की तरफ बढ़ रहा है। हवा में तेजी से जहर घुल रहा है। नर्मदा नदी के जल में दूषित तत्व मिल रहे है। वाहनों का कानफोडू शोर लोगों का सुकून छीन रहा है। विशेषज्ञों की मानें, तो शहर में प्रदूषण जिस प्रकार फैल रहा है, कुछ वर्षों में हवा दमघोंटू हो जाएगी। नर्मदा नदी का जल आचमन लायक नहीं रहेगा।
पानी का हाल
नर्मदा नदी के तट पर शहर से नरसिंहपुर जिले के बीच अलग-अलग स्थानों पर पानी की जांच में बीओडी (बायो ऑक्सीजन डिमांड) तीन से पांच गुना तक ज्यादा पाई गई है। एक निजी संस्था की जांच में नदी के पानी में घुलनशील ऑक्सीजन की मात्रा कम होने की बात सामने आई है। नाइटे्रट की अधिकता के साथ टोटल कॉलीफार्म आर्गनिज्म (बैक्टीरिया) भी मानक से कई गुना ज्यादा मिले हैं। ऑक्सीजन कम होने से जलीय जंतुओं का जीवन खतरे में है।
साइड इफेक्ट: डायरिया, कालरा, हैपेटाइटिस, टायफायड, गैस्ट्रोलॉजी जैसी बीमारी हो सकती हैं। नाईट्रेट की मात्रा खतरनाक स्तर पर होने से नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है। बीओडी बढऩे से पानी में जहरीलापन आएगा।
हवा की रंगत बदली
शहर में हवा की गुणवत्ता जांचने के लिए मढ़ाताल में एयर क्वालिटी मॉनीटिरिंग स्टेशन स्थापित किया गया है। स्टेशन पर रेकॉर्ड की जा रही हवा की गुणवत्ता खतरनाक है। कुछ वर्षों तक शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स संतोषजनक स्तर पर था। लेकिन अब यह मॉडरेट लेवल को भी पार कर गया है। शहर के बीच हवा पुअर कैटेगिरी में है। हवा में पीएम-2.5 और पीएम-10 की मात्रा खतरनाक स्तर पर है।
साइड इफेक्ट: पीएम 2.5 और 10 के कण हवा के साथ घुलकर लोगों के शरीर में प्रवेश कर रहे है। सांस के साथ ये कण फेफड़ों में जा रहे है। सांस, खांसी और अस्थमा की समस्या हो रही है।
प्लास्टिक जानलेव
शहर में प्रतिदिन निकल रहे कचरे में करीब आधी मात्रा प्लास्टिक कचरे की है। प्लास्टिक के कुल कचरे में लगभग आधा खतरनाक सिंगल टाइम यूज प्लास्टिक का है। इसमें बड़ी मात्रा पाउच, सेसे, कैरी बैग और डिस्पोजेबल की है। एक बार उपयोग के बाद फेंक दी जाने वाली ये पॉलीथिन/प्लास्टिक पर्यावरण को कई प्रकार से नुकसान पहुंचा रही है। नष्ट करने पर हवा में जहरीली गैस घुलती है।
साइड इफेक्ट: प्लास्टिक में गर्म सामग्री पैक करने पर वह खाद्य पदार्थ में घुल जाता है। प्लास्टिक के पेट में जाने से कैंसर सहित कई बीमारी का अंदेशा होता है। जलाने से कई तरह की जहरीले गैस फैलती है।
ध्वनि का दर्द
शहर में वाहनों की संख्या बढऩे के साथ ही उनके संचालन से होने वाला शोर बढ़ा है। व्यस्त और व्यावसायिक क्षेत्रों में वाहनों की रेलमपेल के बीच हॉर्न का शोर बढ़ा है। ध्वनि प्रदूषण को लेकर शहर में सतत निगरानी की व्यवस्था नहीं है। समय-समय पर किए जाने वाले मापन में कुछ स्थानों पर शोर ज्यादा मिला है।
साइड इफेक्ट: शोर के कारण लोगों के स्वभाव में चिड़चिड़ाहट आ रही है। मानसिक तनाव होता है। मॉडीफाइड बाइक के अचानक आवाज करने वाले साइलेंसर बम से घबराकर राहगीर दुर्घटनाग्रस्त और घायल हो रहे है।
प्रदूषण की स्थिति
- 279 पर एक्यूआइ। पहले 50-100 के बीच होता था एक्यूआई
- 352 तक पहुंच गया रविवार को हवा में पीएम 2.5 की मात्रा
- 12 टन सिंगल टाइम यूज प्लास्टिक का कचरा प्रतिदिन निकल रहा
- 03 से पांच गुना तक बीओडी की मात्रा नर्मदा नदी के पानी में
- 55 डेसीमल से ज्यादा शोर कुछ व्यस्त जगह पर होने का अनुमान

आंकड़े डरा रहे हैं
- 90 हजार के करीब वाहन प्रतिवर्ष आरटीओ में हो रहे पंजीकृत।
- 25 टन के तककरीब प्लास्टिक कचरा प्रतिदिन निकल रहा है।
- 10 प्रतिशत इसमें पॉलीथिन, एक लाख से ज्यादा पानी बोतल।
- 60 हजार से ज्यादा 15 साल पुराने वाहन सड़कों पर दौड़ रहे।
- 04 हजार के लगभग वृक्षों की 10 साल में शहर में सड़क बनाने काटे।
- 01 सौ से ज्यादा क्रशर शहर और आसपास चल रहे, धूल उड़ा रहे हैं।