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इस देसी निर्माणी ने किया कमाल, रूस और इजरायल पर कम होगी निर्भरता

जबलपुर के ओएफके में ऑटोमेटेड 30 एमएम बीएमपी-2 बम की असेंबली लाइन शुरू  

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जबलपुर। दुश्मन पर हमला करने के लिए सबसे उपयोगी हथियारों में शामिल 30 एमएम बीएमपी-2 बम का उत्पादन अब जबलपुर स्थिति आयुध निर्माणी खमरिया (ओएफके) में तेज होगा। अभी इस बम को रूस व इजराइज जैसे देशों से सेना को मंगाना पड़ता है। इस बम की ज्यादा संख्या और सुरक्षित उत्पादन के लिए निर्माणी में फिलिंग सेक्शन-5 में ऑटोमेटेड असेंबली लाइन शुरू हुई। ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड के चेयरमैन ने वीसी से इसका उद्घाटन किया। जनसंपर्क अधिकारी अमित सिंह ने बताया कि यह प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को भी साकार करता है। उन्होंने बताया कि इस मौके पर फिलिंग सेक्शन-2 में ट्रेसर शेल 30 एमएम बीएमपी-2 एपी/टी एवं एचई/टी का उद्घाटन कमांडेंट, क्यूए एवं प्रूफ, एसक्यूएइ (ए) एवं एलपीआर खमरिया ब्रिगेडियर निश्चय राउत ने किया। निर्माणी के महाप्रबंधक रविकांत ने इस दौरान कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए हमें इस संकल्प के साथ काम करना चाहिए कि हर उत्पाद की गुणवत्ता सेना के मापदंडों में सर्वश्रेष्ठ होगी। कार्यक्रम में डॉ बीएल मीणा जेसीएफए (एफवायएस) एजीएम एसके राउत, बीबी सिंह, शैलेष बगरवाल, एके अग्रवाल, जेजीएम रजत सक्सेना उपस्थित थे।

यह है खासियत
यह छोटा एवं कारगर बम है। इससे दो से चार किमी तक निशाना लगा सकते हैं। इसकी गन को कहीं भी ले जाया जा सकता है। जमीन से हवा, समुद्र से हवा एवं समुद्र में दुश्मन पर निशाना साधने के लिए बेहद उपयोगी है। इसलिए सेना में इसकी मांग रहती है। जानकारों ने बताया कि स्थिति यह है कि देश में कम मात्रा में इसके बनने से इजराइल और रूस से हर साल 8 से 10 लाख राउंड मंगाने पड़ते हैं। ओएफके में अभी पांच से छह लाख राउंड का उत्पादन होता है। असेंबली लाइन में तीन ऑपरेशन होंगे। इसमें ज्यादातर काम मशीन ही करेगी। बम की गेजिंग, हाइट गेजिंग, वेट गेजिंग, प्रॉपलेंंट में फिलिंग भी ऑटोमैटिक है। इस प्लांट में सारे उपकरण एटीइएक्स द्वारा सर्टिफाइड हैं। यही नहीं सभी फ्लेमप्रूफ हैं। ऑटोमैटिक होने के बाद भी बिल्डिंग में काम करने वाले कर्मचारी इएसडी, रिस्ट बैंड के साथ सेफ्टी शील्ड का उपयोग भी करेंगे।

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