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जबलपुर के कार्यालय खाली, भोपाल से चलता है उद्योग विभाग

एमपीआइडीसी और संयुक्त संचालक कार्यालय में नहीं स्थाई अधिकारी

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MPIDC  jabalpur

उद्योग विभाग के कार्यालयों में वरिष्ठ अधिकारी ही नहीं रहते।

जबलपुर. जिले में नए निवेश की गति धीमी है। जितनी भूमि तीनाें औद्योगिक क्षेत्रों में है, उसका 50 प्रतिशत उपयोग भी नहीं हो पा रहा है। इसकी बड़ी वजह उद्योगों के लिए वातावरण नहीं बनाना है। उद्योग विभाग के कार्यालयों में वरिष्ठ अधिकारी ही नहीं रहते। एमपीआइडीसी के कार्यकारी संचालक के पास भोपाल का प्रभार है। ऐसे में जबलपुर कम आते हैं। संयुक्त संचालक उद्योग का कार्यभार भी डिंडौरी महाप्रबंधक के पास है।

औद्योगिक क्षेत्रों में नए निवेश के लिए जरूरी है कि निवेशकों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं दी जाएं। जबलपुर में निवेशक आना चाहते हैं। कुछ नया निवेश भी कर रहे हैं। लेकिन छोटे-मोटे कामों के लिए उन्हें अधिकारियों का इंतजार करना पड़ता है। कटंगा उद्योग भवन में मप्र इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कारपोरेशन (एमपीआइडीसी) में कार्यकारी संचालक का पद है। लेकिन बीते एक साल से वे नियमित रूप से नहीं बैठते हैं।

भोपाल एवं हेड क्वार्टर का प्रभार

कार्यकारी संचालक सीएस धुर्वे के पास जबलपुर के अलावा भोपाल एवं हेड क्वार्टर का प्रभार भी है। ऐसे में वे जबलपुर में कम समय बिता पाते हैं। ऐसे में यहां उद्योगों से जुड़ी फाइलें कई बार भोपाल भेजनी पड़ती हैं। इसके लिए कर्मचारियाें को भेजा जाता है। जबकि होना यह चाहिए कि यहां पर नियमित रूप से अधिकारी रहे। एमपीआइडीसी के अंतर्गत न केवल जबलपुर बल्कि संभाग के कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, नरसिंहपुर और मंडला जिले भी आते हैं। इन जगहों पर बडे़ औद्योगिक क्षेत्र संचालित हैं।

उद्योग विभाग में स्थाई अधिकारी नहीं

शहर में उद्योग कार्यालय में संयुक्त संचालक का कार्यालय भी संचालित होता है। यह कार्यालय भी प्रभारी के भरोसे चल रहा है। अभी डिंडौरी में पदस्थ जिला व्यपार एवं उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक के पास यहां का प्रभार है। ऐसे में दोनों विभागों में अधिकारी पूरा समय इनसे जुडे़ कामों को नहीं दे पाते हैं।

हरगढ़ और मनेरी की

भूमि खाली एमपीआइडीसी के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र मनेरी, औद्योगिक क्षेत्र हरगढ़ और औद्योगिक क्षेत्र उमरिया-डुंगरिया आता है। हरगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में 290 हेक्टेयर से ज्यादा औद्योगिक भूमि है। उसमें गिनती के उद्योग संचालित हैं। चरगवां के पास उमरिया-डुंगरिया औद्योगिक क्षेत्र में 316 हेक्टेयर भूमि है। यहां पर दो फेज में औद्योगिकरण हो रहा है। फेज 1 में तो तकरीबन सारे प्लॉट बुक हो गए हैं अब फेज-2 में निवेश का काम चल रहा है। यही हाल मनेरी है। यहां तो आज भी औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग नहीं होने से खेती होती है।