26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां अवैध रेत की मंडी बने ‘एशिया’ के सबसे उपजाऊ खेत

शहर से 30 किमी. दूर शहपुरा का है। एशिया की सबसे उपजाऊ  जमीन के लिए मशहूर रहा यह कस्बा अब अवैध रेत की मंडी बन गया है।

2 min read
Google source verification

image

Abha Sen

Sep 15, 2015

sand

sand

जबलपुर। प्रदेश में रेत माफिया किस कदर पैर बसारते जा रहे हैं इसका नजारा शहपुरा स्थित उस स्थान पर देखने मिला जो एशिया की सबसे उपजाऊ जमीन के रूप में जाना जाता है। यहां गन्ने के खेत अब रेज के स्टॉक वाले स्थान में परिवर्तित हो चुके हैं।
शहर से 30 किमी. दूर शहपुरा का है। एशिया की सबसे उपजाऊ जमीन के लिए मशहूर रहा यह कस्बा अब अवैध रेत की मंडी बन गया है। माफिया ने स्टॉक को केले के पत्तों से ढंक दिया है। रेत के कारोबार को अब यहां के लोग बगैर निवेश रातों-रात करोड़पति बनाने का फॉर्मूला मानने लगे हैं। पत्रिका ने पड़ताल की, तो चौंकाने वाले नजारे सामने आए। लोगों ने फसल की बुवाई के बजाय खेतों को रेत से पाट दिया है।
50-50 मीटर पर स्टॉक

शहपुरा-गोटेगांव मार्ग से भेड़ाघाट मार्ग, भोपाल बाइपास, झोझी, झांसीघाट तक खेत रेत से पटे हैं। कई जगह तो 50-50 मीटर की दूरी पर रेत के बड़े स्टॉक हैं, जिनमें 100 डम्पर से ज्यादा रेत है।
चप्पे-चप्पे पर मुखबिर

माफिया ने स्टॉक के आस-पास चप्पे-चप्पे पर मुखबिर तैनात कर रखे हैं। कार्रवाई की आशंका पर वे माफिया तक पूरी जानकारी पहुंचा देते हैं। फिर सेटिंग होती है।
दोहरा नुकसान

एक ओर खनन माफिया शासन को रॉयल्टी का चूना लगा रहा है। साथ में अवैध खदानों में मनमाने उत्खनन से नर्मदा, हिरन और गौर में जलीय जीवों पर भी संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी नदी में गहराई तक खनन होने पर रेत नहीं बचती, तो जल शोधन प्रभावित होता है। इस कारण जलीय जीव मर जाते हैं। खनिज महकमे को स्वीकृत स्थलों की जानकारी है, इसलिए अवैध स्टॉक पर कार्रवाई करना और भी आसान है, इसके बावजूद जिम्मेदार कार्रवाई नहीं कर रहे है।

ये भी पढ़ें

image