
The second line firing of the Dhanush cannon in the Pokaran range has opened the way for its deployment on the border and use by the army in combat. The cannon was successfully test fired on Tuesday.
जबलपुर@ज्ञानी रजक. 40 किमी तक निशाना साधने वाली 155 एमएम 45 कैलीबर धनुष तोप को गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) में तैयार कर डिस्पैच तो किया जा रहा था लेकिन यह तोप सीमा पर तैनाती की जगह सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो (सीओडी) में रखी रहती थीें। क्योंकि सेना को इसे अपने बड़े मापदंड में परखना था। यह मापदंड था सेकंड लाइन फायरिंग का। इस पर दोनों तोप खरी उतरीं। इसकी मांग थलसेना द्वारा बार-बार की जा रही थी। इससे पहले सिंगल सेकंड लाइन फायरिंग की जा चुकी है। उसमें यह तोप सभी मापदंडों को पूरा कर चुकी है।
क्या है सेकंड लाइन फायरिंग
इस फायरिंग का एक मकसद यह है कि यदि युद्ध की स्थिति निर्मित होती है तो लगातार फायरिंग में तोप का प्रदर्शन कैसा रहता है। इस प्रक्रिया में एक साथ दो तोप से फायरिंग की जाती है। लगातार दो से तीन घंटे फायरिंग होती है। इसमें तोप की कार्यप्रणाली को परखा जाता है। मंगलवार को सुबह दो तोप को राजस्थान स्थित पोकरण रेंज में रखा गया। फिर दनादन गोले दागे गए। दोनों तोप से भारी भरकम 155 एमएम के गोला दागे गए। दोनों तोप से दो से तीन घंटे में 90-90 राउंड फायरिंग की गई। सभी से सटीक निशाना लगा। जहां टारगेट किया गया था, वे वहीं पर गिरे।
कई बार प्रयास, अब सफलता
जीसीएफ इससे पहले भी सेना की मांग पर इस फायरिंग को कर चुका है लेकिन उसमें कई प्रकार की अड़चन आ रही थीं। इसलिए सेना चाहकर भी इस तोप को बॉर्डर या संवेदनशील इलाके में तैनात नहीं कर पा रही थी। तोप जीसीएफ से डिस्पैच होकर डिपो में खड़ी कर दी जाती थी। लेकिन अब जो भी तोप डिस्पैच होगी, उसे सेना इस्तेमाल कर सकेगी। पोकरण पहुंचकर जीसीएफ के महाप्रबंधक दीपक गुप्ता ने पूरी टीम का हौंसला बढ़ाया। इसी प्रकार सेना के डायरेक्टर जनरल आर्टलरी सहित कई बड़े अधिकारी इस फायरिंग को देखने के लिए पहुंचे थे।
गोला दागे, फिर दौड़ाया
इस टेस्टिंग में पहले तोप से 45-45 राउंड गोला दागे गए। फिर रोड ट्रायल के लिए दोनों को पोकरण रेंज में दौड़ाया गया। ऊबड़-खाबड़ स्थानों पर परखा। ऐसे में जब वह वापिस लौटी तो कीचड़ से सनी थी तो किसी भाग पर बड़ी धूल थी। फिर इसके बाद बांकी 45-45 राउंड की फायरिंग हुई।
जीसीएफ के लिए खुशी का क्षण है। धनुष तोप ने सेना के सबसे कठिन डबल सेकंड लाइन फायरिंग के मापदंड को पार कर लिया है। अब इस तोप को यूजर इस्तेमाल कर सकेगा। इसी प्रकार उत्पादन भी तीव्र गति से हो सकेगा।
संजय श्रीवास्तव, अपर महाप्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी जीसीएफ
Updated on:
09 Mar 2022 11:57 pm
Published on:
09 Mar 2022 11:55 pm
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