
हेलमेट की अनिवार्यता (Photo Source- Patrika)
जबलपुर। हाईकोर्ट ने पूछा कि जिस मेडिकल कोर्स को केंद्र सरकार ने मान्यता दी है, उसका पंजीयन देने से मध्यप्रदेश सरकार क्यों मना कर रही है? जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस विशाल धगट की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग सचिव, राज्य के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग प्रमुख सचिव, मप्र मेडिकल काउंसिल भोपाल के रजिस्ट्रार एवं नेशनल मेडिकल कमीशन के सचिव को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।
यह है मामला
हरदा निवासी डॉ. लक्ष्य नेमा ने याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि उन्होंने 2021 में कॉलेज ऑफ फिजिशियन एंड सर्जन मुंबई से डिप्लोमा इन मेडिकल रेडियोलॉजी एंड इलेक्ट्रोलॉजी (डीएमआरई) का कोर्स किया है। अधिवक्ता आदित्य संघी ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार ने 2018 में अधिसूचना जारी कर वर्ष 2009 से इस कोर्स को मान्यता दी।
11 फरवरी 2020 को डीएमआरई को दी मान्यता
प्रदेश सरकार ने भी राजपत्र में गजट नोटिफिकेशन के जरिए 11 फरवरी 2020 को डीएमआरई को मान्यता दी।
याचिकाकर्ता ने इस कोर्स के आधार पर मप्र मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया। लेकिन, मेडिकल काउंसिल ने आवेदन निरस्त कर दिया।
यह तर्क दिया
अधिवक्ता संघी ने तर्क दिया कि जिस कोर्स को सरकार ने ही मान्यता दी है, मेडिकल काउंसिल की ओर से सुनवाई का अवसर दिए बिना पंजीयन का आवेदन निरस्त करना अनुचित व अवैधानिक है।
Updated on:
07 Oct 2025 01:00 pm
Published on:
25 May 2022 07:33 pm

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