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नर्मदा-पहाड़-जंगल और खूब पानी.. तभी तो खुशनुमा है संस्कारधानी

नर्मदा-पहाड़-जंगल और खूब पानी.. तभी तो खुशनुमा है संस्कारधानी  

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jabalpur hills

जबलपुर. कड़ाके की ठंड के साथ गुनगुनी धूप शहरवासियों को खुशनुमा मौसम का अहसास करा रही है। सुबह कंपा देने वाली ठंड का अहसास, दोपहर में तेज धूप और शाम होते ही पारा फिर लुढ़कने लगता है। ऐसे में लोगों की जुबान पर शहर के खुशनुमा मौसम की चर्चा फिर आम हो गई है।

वैज्ञानिकों के अनुसार प्राकृतिक रूप से यहां का वातावरण संतुलित होने के कारण साल के चारों मौसम में यहां एक जैसी बहार देखने मिलती है। वैज्ञानिकों के अनुसार पर्यावरण संतुलित रहने का मुख्य कारण शहर के चारों ओर पहाड़ी, बड़ा हरित क्षेत्र, तीन नदियां, बड़ी संख्या में तालाब और यहां की भूगर्भीय टोपोलॉजी है।

तीन नदिया और हर तरफ तालाब

नगर में जीवनदायिनी नर्मदा, सहायक नदी गौर और परियट का लम्बा तट है। इसके साथ ही नई नगरीय सीमा में 50 से ज्यादा तालाब हैं। बड़े हरित क्षेत्र के साथ इन जल स्रोतों की मौजूदगी यहां कड़ाके की ठंड के लिए अनुकूल स्थिति बनाती है। गर्मी के दिनों में तापमान 40-44 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचते ही लोकल क्लाउड सक्रिय हो जाते हैं। इससे हल्की बारिश से तापमान में चार-पांच डिग्री की गिरावट आ जाती है। चारों ओर से पहाड़ी और हरित क्षेत्र से घिरे होने के कारण बारिश के अनुकूल स्थिति बनने से तेज बरसात होती है। जबकि जिले के शहपुरा ब्लॉक में सिमटता हरित क्षेत्र बारिश कम होने का कारण बन रहा है।

चार प्रकार की चट्टानें

मदन महल पहाड़ी से लेकर बरगी हिल्स, नील गिरि, सिद्ध बाबा की पहाड़ी, जीसीएफ की पहाड़ी, शोभापुर, गंगा मैया पहाड़ी, मुंडी टोरिया की पहाड़ी से शहर घिरा हुआ है। नगर की भूगर्भीय टोपोलॉजी में भी विविधता है। शहर में ग्रेनाइट, रेतीली चट्टान, सफेद संगमरमर और कुछ जगहों पर काले संगमरमर की चट्टानें भी हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रेनाइट चट्टानें तेजी से गरम होती हैं। जबकि संगमरमर और सैंड स्टोन तेजी से ठंडी होती हैं।


चारों ओर पहाड़ी व हरित क्षेत्र होने के साथ यहां नदियों और अन्य जलस्रोतों की मौजूदगी व भूगर्भीय टोपोलॉजी के कारण शहर का पर्यावरण संतुलित रहता है। यही कारण है यहां कड़ाके की ठंड पडऩे के साथ तेज गर्मी और अच्छी बारिश होती है।

डॉ. पीआर देव, वैज्ञानिक