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जबलपुर। आबादी और नजूल भूमि पर पट्टा के लिए आवेदन निरस्त होने की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसका एक बड़ा कारण यह है कि कई लोगों ने ग्रीन बेल्ट और निजी भूमि पर आवेदन किया है। इसी प्रकार कई आवेदनों की जांच गम्भीरता से नहीं किए जाने के कारण भी ऐसी स्थितियां निर्मित हो रही हैं। प्रशासन ने 11 सौ से ज्यादा आवेदन निरस्त किए हैं। उसमें ज्यादातर में इसी प्रकार के कारण बताए गए हैं। ज्ञात हो कि अब तक 16 हजार आवेदन इस योजना का लाभ लेने के लिए आ चुके हैं।
जिले में शहरी क्षेत्र में आबादी भूमि पर भूमि स्वामी अधिकार पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। नजूल की जमीन पर 31 दिसंबर 2014 तक काबिज लोगों को धारणाधिकारी योजना के अंतर्गत पट्टे प्रदान किए जा रहे हैं। जिस प्रकार शहरी क्षेत्र में लोग नजूल की जमीन पर निवासरत हैं, उसकी अपेक्षा आवेदन कम हैं। जितने आवेदन आए हैं, उनमें से कई निरस्त हो रहे हैं। इसके अलावा उनकी जांच का काम भी बहुत धीमा है। ढाई हजार आवेदनों को अधिकारियों ने अब तक जांच में लिया है।
यह है स्थिति
● जिले में अब तक 15 हजार 900 प्रकरण दर्ज।
● 14 हजार 200 आवेदन वर्ष 2021-22 के हैं।
● 1650 आवेदन आए हैं चालू वित्तीय वर्ष में।
● अब तक 25 सौ से ज्यादा आवेदनों की जांच।
● 1150 जगहों के आवेदन हो चुके हैं निरस्त।
● 13 हजार 300 प्रकरणों का होना है निपटारा।
कई तरह के होंगे फायदे
पट्टों के कई फायदे लोगों को मिलेंगे। वे भूमि स्वामी कहलाएंगे। बैंक से लोन लेना आसान होगा। वे अपने आवास बनवा सकेंगे। यदि वह इसका विक्रय करेंगे तो उसमें भी उन्हें अलग दाम मिलेंगे। हालांकि इसके लिए उन्हें उतनी जमीन का प्रीमियम चुकाना पडे़गा, जितने क्षेत्रफल पर पट्टे का दावा किया जा रहा है। ऐसे भी मामले सामने आ रहे हैं कि जिनका पट्टा स्वीकृत हो गया है लेकिन हितग्राही तय की गई राशि नहीं चुका रहा है।
जिन जगहों पर पट्टा नहीं मिलना है, उनकी सूची शासन की तरफ से जारी की गई है। ऐसी जगहों के आ रहे आवेदनों को निरस्त किया जाता है। फिर भी प्रयास किया जा रहा है कि नियमानुसार ज्यादा से ज्यादा इस योजना का लाभ लोगों को मिले।
- मणिन्द्र सिंह, डिप्टी कलेक्टर, प्रभारी धारणाधिकार योजना
Published on:
01 Sept 2022 10:41 am
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