
Jabalpur Municipal Corporation
जबलपुर. शहर के विकास को लेकर लोगों की नजरें नगर निगम पर टिकी हैं। कई इलाकों में गली-मोहल्लों की बदहाल सड़कों से लेकर बरसात में चोक हो जाने वाले ड्रेनेज सिस्टम में सुधार का इंतजार लम्बे समय से है। बदलाल मुक्तिधाम और उद्यानों के भी उद्धार का इंतजार है। उधर, नगर निगम की वित्तीय स्थिति खराब है। आमदनी और खर्चे की बैलेंसशीट में भारी असंतुलन है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है की इंदौर की तर्ज पर यहां भी नगर निगम विकास कार्यों के लिए बॉण्ड जारी कर राशि जुटा सकता है।
कुछ महीनों में निगम पौने दो सौ करोड़ से ज्यादा के विकास कार्य स्वीकृत कर चुका है। सीवर प्रोजेक्ट में भी निगम को अपनी हिस्सेदारी की बड़ी राशि देनी है। इंदौर में सोलर एनर्जी के लिए जारी बॉण्ड में आम निवेशकों सहित कॉर्पोरेट सेक्टर ने भी आवेदन किए हैं। हाईनेट वर्थ इंडिविजुअल्स के निवेशकों ने भी दिलचस्पी दिखाई है।
आय के मुकाबले खर्चा कई गुना
निगम की आय की तुलना में वर्तमान खर्च बहुत ज्यादा है। ऐसे में निगम के गलियारों में यह चर्चा हो रही है कि आगामी दिनों में कर्मचारियों के सामने वेतन का संकट आ सकता है।
शहर में हैं बड़ी सम्भावनाएं
जानकारों के अनुसार नर्मदा के बड़े किनारे से लेकर चारों ओर नैसर्गिक सौंदर्य से समृद्ध पहाड़ियों के कारण जबलपुर में पर्यटन सेक्टर के विकास की अपार सम्भावनाएं हैं। नगर निगम के पास बड़ा हरित क्षेत्र है। इसमें वृहद स्तर पर सोलर एनर्जी प्लांट लगाया जा सकता है। दोनों ही सेक्टर में बॉण्ड जारी कर फंड जुटाने के लिए निवेशकों को आकर्षित किया जा सकता है। निवेश आने पर शहर विकास को गति मिलेगी। फंड का संकट भी दूर होगा।
सम्पत्ति कर, जल शुल्क व अन्य मदों से समय पर राजस्व प्राप्त करने के लिए प्रयास बढ़ाएंगे। बॉण्ड कॉन्सेप्ट का अध्ययन कर नगर हित में जो भी बेहतर संभव होगा, काम करेंगे। जिससे फंड का संकट न रहे और विकास के काम तेजी से हो सकें।
स्वप्निल वानखड़े, आयुक्त, नगर निगम
Published on:
19 Feb 2023 03:25 pm
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