
Jabalpur Property
Jabalpur Property :काली कमाई की अवैध कॉलोनियों पर नए साल में बड़ा प्रहार करते हुए नगर निगम ने 104 कॉलोनाइजरों पर एफआइआर दर्ज कराई है। इन पर कॉलोनाइजर एक्ट के तहत शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है। अवैध कॉलोनी बसाकर करोड़ों के वारे-न्यारे करने वाले बिल्डर-कॉलोनाइजरों को विकास शुल्क भी चुकाना होगा। यह अवैध कॉलोनियां वर्ष 2016 के बाद बनाई गई है।
अवैध कालोनी बसाने के लिए जिम्मेदार जिन बिल्डरों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है उनमें शहरभर की अवैध कालोनी शामिल हैं। सबसे ज्यादा अवैध कालोनी गोहलपुर, पुरवा, गढ़ा, करमेता,चावनपुर, कछपुरा, बसहा, कजरवारा, रिमझा, सगड़ा, बेतला, माढ़ोताल, गौरीघाट, मानेगांव, कुदवारी, पिपरिया, लक्ष्मीपुर, रामपुर, बिलपुरा क्षेत्र की हैं।]
प्रदेश शासन ने 31 दिसंबर 2022 तक की अवैध कॉलोनियों को वैध करने का निर्णय लिया था। कॉलोनी नियमित करने के लिए आवास-जमीन के लिए अलग से भी भूअनुज्ञा सहित अन्य मंजूरियों के लिए निर्धारित शुल्क देकर आवेदन करने का प्रावधान किया था। इसमें अलग से सर्वे की जरूरत नहीं है। सरकार ने पुराने सर्वे को ही मान्य कर नियमितीकरण का फैसला किया गया था। यानी सिर्फ आवेदन ही करना होता है। दरअसल, पहले 31 दिसंबर 2016 तक की कॉलोनियों को वैध करने का फैसला किया था।
इससे पहले निगम 86 बिल्डरों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करा चुका है। ये वे बिल्डर हैं जिन्होंने 2016 के पहले अवैध कालोनियों का निर्माण किया है। इस प्रकार अब तक 190 अवैध कालोनियों के कालोनाइजर के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराकर इन कालोनियों के नियमितिकरण के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जिन बिल्डरों ने अवैध कालोनी बसाई हैं उनमें कई ऐसे हैं जिन्होंने राजनीतिक रसूख का लाभ लेकर अवैध कालोनियां बसा दीं। इनमें कांग्रेस नेता डॉ.संजय चौधरी, कदीर सोनी से लेकर भाजपा के नरेन्द्र जायसवाल के नाम बताए जा रहे हैं।
पत्रिका ने अवैध कॉलोनियों से मिले मुक्ति का अभियान छेड़ा तो अधिकारियों के कान खड़े हुए। मुहिम के तहत प्रकाशित खबरों में अवैध कॉलोनी काटने वालों के गोरखधंधे को उजागर किया था। इसके बाद नगर निगम ने शहरी क्षेत्र में बसाई गई कॉलोनियों के खिलाफ संबंधित थानों में शिकायत दर्ज कराई है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में जिला प्रशासन के कॉलोनी सेल ने भी लम्हेटाघाट क्षेत्र में 7 कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किया था।
शहर में अवैध कालोनी बसाने वाले 104 बिल्डर, कालोनाइजर को नियमानुसार विकास शुल्क चुका कर कॉलोनियों का नियमितीकरण भी कराना होगा। विकास शुल्क की राशि क्षेत्रवार तय की गई है। जिसमें 14 रुपए से 120 रुपए वर्गफीट तक की राशि देय होगी। ये सभी कॉलोनियां 2016 के बाद विकसित की गई है। नगरनिगम अधिकारियों ने बताया कि शहर के अलग-अलग थानों में दस्तावेज के साथ शिकायतें दी गई थीं। पुलिस विभाग ने 104 प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी दी है। इसके पूर्व की 86 कॉलोनियों पर पहले ही प्रकरण दर्ज कराया गया था। इस तरह अब 190 कॉलोनियों पर कार्रवाई की जा रही है।
Updated on:
02 Jan 2025 11:09 am
Published on:
02 Jan 2025 11:06 am
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