
जबलपुर। वैसे तो करवा चौथ का व्रत सुहागिन अपने पति की लंबी आयु स्वस्थ जीवन के लिए करती हैं। लेकिन इसकी मूल कहानी या कथा भाई और बहन के प्रेम में छपी है। जहां भाई अपनी बहन को तनिक भी तकलीफ में नहीं देख पाता। उसकी भूख प्यास से वह व्याकुल हो जाता है। यह व्रत ऐसे ही भाई-बहन के स्नेह से जुड़ी है। जहां एक भाई अपने घर आई बहन की व्याकुलता और परेशानी से व्यथित होकर उसे नकली चांद के दीदार करा देता है। तब यह कथा का शुभारंभ होता है और इसके मायने निकलते हैं कि सच्चे मन से यदि कोई सुहागन इस व्रत को रख ले तो उसके पति को यमराज भी ले जाने की हिम्मत नहीं कर पाते हैं। उन्हें झुकना ही पड़ता है।
इस बार 8 अक्टूबर को करवा चौथ व्रत होगा। इसकी तैयारियों के के लिए महिलाएं बाजारों में जमकर खरीदारी कर रही हैं। आभूषण वस्त्रादि के साथ हो पूजन सामग्री व करवा भी खरीदा जा रहा है। शुभ मुहूर्त शाम 6:00 बजे से रहेगा। वही चंद्र दर्शन सवा 8:00 बजे के आसपास होने की संभावना है।
ज्योतिषाचार्य पंडित जनार्दन शुक्ला के अनुसार एक साहूकार के सात बेटे और उनकी एक बहन थी करवा। सभी भाई अपनी बहन को बहुत प्यार करते थे। यहां तक कि वह उसे खाना पहले खिलाते बाद में स्वयं कहते हैं। शादी होने के बाद जब पहली बार उसकी बहन मायके आई और सभी भाई दिन भर व्यापार करने का आज शाम को घर लौटे। उन्होंने बहन करवा को व्याकुल देखा। बहन के साथ खाने को बैठे भाइयों ने उसे आग्रह किया लेकिन बहन ने बताया कि वह चौथ का निर्णय निर्जला व्रत रखे हुए है। चंद्रमा देखकर ही उसे अर्घ देगी तत्पश्चात भोजन ग्रहण करेगी। क्योंकि चांद अभी तक नहीं आया है इसलिए वह भूख-प्यास से व्याकुल है। सबसे छोटे भाई को उसकी बड़ी बहन की है व्याकुलता नहीं लेकर गई और उसने दूर एक पीपल के पेड़ पर दिया जलाकर छलनी में रख दिया। दूर से देखने पर ऐसा लगा जैसे चांद उदित हो गया हो।
उसके बाद भाई ने अपनी बहन को बताया कि चांद निकल आया है। अर्घ देकर भोजन कर सकती हो। बड़ी बहन उसकी बातों में आ गई और विश्वास कर छत पर चढ़ी और उसी छलनी को देख कर उसने अर्घ्य दिया और भोजन ग्रहण करने लगी। जैसे ही मैं पहला टुकड़ा मुंह में डाल रही थी छींक आ गई। दूसरे टुकड़े में उसके बाल निकाला या तीसरे में डालने की कोशिश करे तो उसे पति की मृत्यु का समाचार प्राप्त हो गया और वह बौखला उठी।
उसकी भाभी उसे सच्चाई से अवगत कराती हैं कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ है। करवा चौथ का व्रत गलत तरीके से टूटने के कारण उसके देवता नाराज हो गए हैं। सच्चाई जानने के बाद करवा यह प्रण लिया कि जब तक पति के प्राण वापस नहीं आ जाते हैं। वह इंद्र को मनाती रहेगी और पति का अंतिम संस्कार नहीं होने देगी। उसका सतीत्व उसे पुनर्जीवित करेगा। 1 साल तक वह अपने पति के साथ बैठी रही। उसकी देखभाल करती उसके ऊपर उगने वाली घास को एकत्रित करती जाती। 1 साल बाद फिर करवा चौथ का दिन आया उसकी सभी भाभियां करवा चौथ का व्रत रखती है। जब भाभियों से आशीर्वाद लेने आती है तो वह प्रत्येक भाभी से अपनी जैसी सुहागन बना दो ऐसा आग्रह करती हैं। लेकिन हर बार भाभी उसे अगली भाभी से आग्रह करने का कह कर चली जाती है।
चूंकि सबसे छोटे भाई की वजह से टूटा था। उसकी पत्नी में ही शक्ति है कि वह तुम्हारे पति को दोबारा जीवित कर सकती है। इसलिए जब भी वह आए तो मुझे पकड़ लेना और तुम्हारे पति को जिंदा ना करे तो उसे छोड़ना नहीं। अंत में सबसे छोटी भाभी उसके पास आई तो करवा उनसे भी सुहागन करने का आग्रह करती है। लेकिन वह टाल मटोल करने लगती है। इसे देख करवा उन्हें जोर से पकड़ लेती और सुहाग को जिंदा करने के लिए कहती है। वह भी उसे छुड़ाने की कोशिश करती लेकिन करवा ने उसे नहीं छोड़ा। अंत में उसकी तपस्या देख भाभी पसीज जाती है और छोटी उंगली को चीर कर उसमें से अमृत उसके पति के मुंह में डाल देती है। करवा का पति तुरंत श्री गणेश श्री गणेश कहता हुआ उठ जाता है। किस प्रकार छोटी भाभी के माध्यम से करवा को अपना सुहाग वापस मिल जाता है। तभी से यह व्रत सुहागिनों द्वारा विश्वास के साथ रखा जाने लगा और अनादि काल से आज तक जारी है।
Published on:
05 Oct 2017 02:32 pm
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