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मां कात्यायनी: इनकी उपासना करें, जल्द होगा विवाह

वासंतेय नवरात्र की षष्ठी पर मंगलवार को होगा मां कात्यायनी का पूजन, इन्हींने किया था महिषासुर का वध

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Prem Shankar Tiwari

Apr 12, 2016

Katyayini maa

Katyayini maa

जबलपुर। नवरात्र अंतरमन की शक्तियों को जाग्रत करने का महापर्व है। जिसकी नौ में कुछ इंद्रियां ही जाग्रत हो जाएं तो उसका जीवन धन्य हो जाता है। मंगलवार को मां आदि शक्ति के कात्यायनी स्वरूप के पूजन का दिन है। मां कात्यानी को महिषासुर मर्दिनी भी कहा जाता है। ये दुष्टों का संहार करके जीवन में खुशियां भर देती हैं। माना जाता है कि विवाह के इच्छुक युवक-युवतियां इस दिन यदि विधि-विधान से मां कात्यायनी का पूजन करें, तो उन्हें इच्छित फल और वर की प्राप्ति होती है। विवाह शीघ्र होता है।

ये है उपाय
पं. जनार्दन शुक्ला व अखिलेश त्रिपाठी के अनुसार मंगलवार को नवरात्र की षष्ठी का दिन भी बेहद शुभ संयोग लेकर आ रहा है। इस दिन के स्वामी कार्तिकेय हैं और नित्यदेवी माहेश्वरी हैं। माहेश्वरी मां पार्वती का भी नाम है, यानी मां-बेटे का संयोग..। मां कात्यायनी को वरदायिनी भी माना जाता है। जिनके विवाह में विलम्ब हो रहा हो, वे युवतियां लाल या गुलाबी वस्त्र पहनकर और युवक स्वेत या पीले कपड़े पहनकर माता कात्यायनी का आवाहन करें। पूजन के समय मां को लाल पुष्प चढ़एं और धूप-दीप के बाद नेवैद्य में लाल मीठे का भोग अर्पित करें। रात्रि में मां का ध्यान करके शयन करें, निश्चित तौर पर आपकी मनोकामना पूर्ण होगी।

ये है मां का स्वरूप
चार भुजाओं वाली मां कात्यायनी का स्वरूप अंत्यंत तेजोमय व चमकीला है। वे अभय मुद्रा तथा वरमुद्रा में में सिंह पर आरुढ़ हैं। उनके बाईं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनकी भक्ति और उपासना से मनुष्य को अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष नाम के चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।

ये भी है दर्शन
ज्योतिषाचार्र्य पं. स्व. हरिप्रसाद तिवारी की पुस्तक के अनुसार पहला दिन शैलपुत्री का है यानि संकल्प चट्टान की तरह होना चाहिए। दूसरा दिन ब्रम्हचारिणी का है। इसका मतलब यही है कि संकल्प की पूर्ति के लिए एक ब्रम्हचारी की तरह सादगीयुक्त होकर जुटना चाहिए। चकाचौंध में फंस जाने वालों की सफलता संदिग्ध होती है। तीसरा दिन सिंहारूढ़ मां चंद्रघंटा का है जो बताता है कि संकल्प की पूर्ति के लिए पूरे सामथ्र्य के साथ जुट जाना चाहिए, लेकिन धैर्य नहीं खोना चाहिए। मां कूष्माण्डा का स्वरूप यही दर्शाता है कि धैर्य के साथ काम करने से ही आपके लिए प्लेटफार्म यानी लक्ष्य की पृष्ठभूमि का सृजन होता है। वरदायक मां उसमें सहायता करती हैं। स्कंदमाता का पंचम स्वरूप भी यही बताता है कि जब संकल्प पक्का हो तो वह पूरा ममत्व छलकाकर भक्तों की सहायता करती हैं। षष्ठम स्वरूप में मां कात्यायनी आज्ञा चक्र को जाग्रत कराकर जीवन संघर्ष में जीत को सुनिश्चित कराती हैं।
- प्रेमशंकर तिवारी

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