
फिल्म केदारनाथ को लेकर बजरंग दल ने किया प्रदर्शन
जबलपुर। फिल्म केदरनाथ के प्रदर्शन पर प्रतिबंध की मांग करते हुए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को ग्वारीघाट रोड स्थित मॉल के सामने जमकर प्रदर्शन किया। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं व पुलिस के बीच झड़प भी हुई। प्रदर्शन कर्ताओं का कहना है कि इस फिल्म में समाज विशेष की धार्मिक भावनाओं पर आघात किया गया है। इस पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। आक्रोश और बजरंग दल के प्रदर्शन के देखते हुए मॉल में मूवी का शो रद्द कर दिया गया। मॉल के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
त्रासदी को मजाक बनाया
प्रदर्शन कर रहे बजरंग दल के कार्यकर्ता योगेश कुमार व उनके साथियों का कहना था कि फिल्म में केदारनाथ की त्रासदी का मजाक बना दिया गया है। इसे एक लव स्टोरी के रूप में दिखाया जा रहा है। इससे पूरा समाज आहत हुआ है। इस फिल्म पर तक्काल प्रभाव से रोक लगाई जानी चाहिए। मल्टीप्लेक्स में फिल्म के प्रदर्शन को रोकने को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ तीखी नोंक-झोंक व झड़प भी हुई। हंगामे के कारण मूवी के दो शो रद्द कर दिए। काफी देर तक विवाद के बाद प्रदर्शनकारियों को फिल्म का एक शो दिखाए जाने की सहमति बनने के बाद हंगामा रुका। इस संबंध में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर फिल्म का प्रदर्शन प्रतिबंधित करने की मांग भी की गई है।
उत्तराखंड में रोक
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य में फिल्म ‘केदारनाथ’ के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है । पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने शुक्रवार को बताया कि राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को शांति-व्यवस्था बरकरार रखने के लिए यह निर्देश दिया है। पूरे राज्य में केदारनाथ फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। इससे पहले राज्य सरकार ने सतपाल महाराज की अध्यक्षता में एक समिति गठित का गठन किया था। इसी समिति की सिफारिश पर राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है। उल्लेखनीय है कि पटौदी के नवाब सैफ अली खान और उनकी पहली पत्नी अमृता सिंह की बेटी सारा अली खान की यह पहली फिल्म है। हिमालय की वादियों में डायरेक्टर अभिषेक कपूर ने इस फिल्म को एक लव स्टोरी के रूप में तैयार किया है।
कोर्ट में लगी थी याचिका
इससे पहले उत्तराखंड हाई कोर्ट ने गुरुवार को फिल्म ‘केदारनाथ’ की रिलीज पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत और अपना फिल्मी सफर शुरू कर रहीं सारा अली खान मुख्य भूमिका में हैं। गढ़वाल के स्वामी दर्शन भारती ने मांग की थी कि फिल्म पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा कि भारती को अपनी शिकायत के साथ रुद्रप्रयाग जिला मैजिस्ट्रेट के पास जाना चाहिए।
मुंबई में भी याचिका
जानकार सूत्रों का कहना है कि उत्तराखंड के अलावा मुंबई और गुजरात हाई कोर्ट में फिल्म को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई थी, जिसे भी खारिज कर दिया गया। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन की एकल पीठ को बताया गया कि फिल्म को प्रतिबंधित कर देना चाहिए क्योंकि यह हिंदू भावनाओं को चोट पहुंचाने के अलावा उन लोगों को भी आघात पहुंचाती है, जो 2013 में आई बाढ़ से प्रभावित हुए थे। इस बाढ़ ने केदारनाथ को काफी नुकसान पहुंचाया था। याचिकाकर्ता की दलील थी कि यह फिल्म मुस्लिम लडक़े और हिंदू लडक़ी के बीच विवाह का संकेत देकर ‘लव जिहाद’ को प्रचारित करती है। इस आपत्ति के मद्देनजर राज्य सरकार ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता वाली एक समिति गठित की थी। इसमें गृह सचिव नितेश कुमार, पुलिस महानिदेशक अनित रतूड़ी और पर्यटन सचिव दिलीप जावलकर शामिल थे।
गरिमा पर ठेस
उधर, मुंबई हाई कोर्ट मेें गुरुवार को एक जनहित याचिका खारिज कर दी गई थी जिसमें फिल्म ‘केदारनाथ’ की रिलीज का विरोध करते हुए कहा गया था कि यह फिल्म धार्मिक भावनाएं आहत करने के साथ-साथ भगवान केदारनाथ की गरिमा को भी घटाती है। मुख्य न्यायमूर्ति नरेश पाटिल और न्यायमूर्ति एमएस कार्णिक की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं। फिर उन्होंने जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2013 में उत्तराखंड में आई भीषण बाढ़ की पृष्ठभूमि में बनी इस फिल्म में न केवल आपदा की गंभीरता को कम करके दिखाया गया है, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं को भी आहत करती है।
Published on:
07 Dec 2018 08:04 pm
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
