
kidney dialysis
जबलपुर। किडनी खराब होने के चलते जीवन से संघर्ष कर रहे रोगियों को सरकारी अस्पतालों में डायलिसिस के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ रहा है। निजी अस्पताल में शुल्क महंगा है। इस स्थिति में जरूरतमंद मरीज डायलिसिस के लिए कर्जा ले रहे हैं, तो अपना घर मकान बेच कर इलाज कर रहे हैं।
यह है हाल
मेडिकल में पांच मशीनें हैं। यहां केवल ऐसे मरीजों की डायलिसिस की जा रही है, जिन्हें इमरजेंसी में आवश्यकता होती है। क्रॉनिक मरीजों को जिला अस्पताल में रेफर किया जा रहा है। जबकि, जिला अस्पतालों में मरीजों की प्रतीक्षा सूची लम्बी है। डायलिसिस सूची के मरीजों में कोई बाहर होता है, तो ही उन्हें मौका मिलेगा। दीनदयाल कार्ड वाले मरीजों की नि:शुल्क डायलिसिस हो रही है। अन्य मरीजों को डायलिसिस कराने में कर्जदार होना पड़ रहा है। कई एेसे हैं जिनकी समय पर डायलिसिस नहीं हो पा रही है। विक्टोरिया अस्पताल में दो मशीन सरकारी हैं। जबकि, मशीन दूसरे संस्थाओं की है, इनमें रियायती दर पर डायलिसिस की जा रही है। अस्पताल में ११० से अधिक मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं, जिन्हें महीनों बाद भी प्राइवेट हॉस्पिटल में जाना मजबूरी है। रियायती दर पर ८५० रूपए में डायलिसिस हो जाती है। प्राइवेट सेंटर में लगभग १४ सौ रुपए जमा करना पड़ता है। शहर के प्राइवेट हॉस्पिटल में डायलिसिस की पर्याप्त सुविधाएं हैं। विक्टोरिया अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ.एके सिन्हा ने बताया कि अस्पताल में डायलिसिस की दो मशीनों की जल्द आएंगी।
बढ़ रहे हैं मरीज
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अनिल जैन के अनुसार किडनी के मरीज बढ़ रहे हैं। ब्लड प्रेशर, शुगर को नियंत्रित न रखने पर किडनी प्रभावित होती है।
यह है स्थिति
शहर में ३५०० से ज्यादा किडनी रोगी
हर रोज १०० से 120 मरीजों की डायलिसिस
विक्टोरिया में औसतन 18 से 22 मरीजों की डायलिसिस
मेडिकल में 14 से 16 मरीजों की डायलिसिस
निजी अस्पतालों में ५० से ज्यादा मरीजों की डायलिसिस
विक्टोरिया-मेडिकल में दीनदयाल योजना के मरीजों की नि:शुल्क
निजी अस्पतालों में 13 सौ से 15 सौ रुपए डायलिसिस शुल्क
एक्यूट व क्रॉनिक मरीज
जहरीला पदार्थ खाने, सर्पदंश, दुर्घटना सहित अन्य स्थितियों में डायलिसिस की आवश्यता होती है। एेसे मरीज एक्यूट कटेगरी में आते हैं, जो ४-६ डायलिसिस के बाद स्वस्थ्य हो जाते हैं। ब्लड प्रेशर, शुगर व अन्य कारणों से जब मरीज की किडनी पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है और उन्हें नियमित डायलिसिस की आवश्यकता होती है, तो वे क्रॉनिक पेशेंट की श्रेणी में आते हैं।
मेडिकल में गम्भीर मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। स्टाफ सीमित होने से यहां क्रॉनिक मरीजों की डायलिसिस नहीं की जा रही है। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल शुरू होने के बाद रूटीन डायलिसिस शुरू की जा सकेगी।
डॉ. अश्विनी पाठक, नेफ्रोलॉस्टि, मेडिकल
Published on:
01 Jan 2018 06:00 am
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