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जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने संचालक पेंशन संचालनालय भोपाल से पूछा कि होमगार्ड के सेवानिवृत्त एएसआई को पेंशन क्यों नहीं दी जा रही है? जस्टिस विवेक रूसिया की सिंगल बेंच ने संचालक को नोटिस जारी किए। उन्हें चार सप्ताह में मामले पर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया।
यह है मामला-
जबलपुर निवासी रमेश प्रसाद सेन ने याचिका में कहा कि वह डिस्ट्रिक कमांडेंट होमगार्ड ऑफिस सिवनी में कार्यरत थे। तीन अक्टूबर 1994 को उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। उन्हें पेंशन व अन्य सेवानिवृत्ति लाभ दिए गए । उन्होंने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 14 नवम्बर 2005 को हाईकोर्ट ने उन्हें बहाल करने का आदेश दिया। बहाल होने के बाद उन्होंने उपादान और सेवानिवृत्ति लाभ सरकारी खजाने में जमा कर दिए। 31 अगस्त 2013 को उन्हें दोबारा सेवानिवृत्त किया गया, लेकिन उन्हें पेंशन व अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए गए। इस मामले में हाईकोर्ट डीजीपी होमगार्ड, डिस्ट्रिक कमांडेंट सिवनी, संयुक्त संचालक संभागीय कार्यालय व जिला पेंशन अधिकारी सिवनी को नोटिस जारी कर चुका है। अधिवक्ता अनिरुद्ध पांडे ने तर्क दिया कि सेवानिवृत्त एएसआइ पिछले साढ़े पांच साल से पेंशन व अन्य लाभ के लिए भटक रहा है।
प्रबंधक को 62 वर्ष तक सेवा में रखें
मप्र हाईकोर्ट ने कहा कि खनिज विभाग के प्रबंधक को 62 वर्ष तक सेवा में रखा जाए। जस्टिस नंदिता दुबे की सिंगल बेंच ने याचिकाकर्ता प्रबंधक को 60 वर्ष में सेवानिवृत्त करने का आदेश निरस्त कर दिया। कोर्ट ने राज्य शासन को निर्देश दिए कि याचिकाकर्ता को बकाया वेतन का भुगतान भी किया जाए।
यह है मामला- भोपाल निवासी तारे कालवेले की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि वे खनिज विभाग में प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। राज्य सरकार ने 31 मार्च 2018 को तृतीय श्रेणी के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी। इसके बाद भी उन्हें 31 मार्च 2018 को 60 वर्ष में सेवानिवृत्त कर दिया गया। अधिवक्ता अभिजीत भौमिक ने तर्क दिया कि राज्य सरकार के आदेश आदेश का लाभ याचिकाकर्ता को नहीं दिया गया।

Published on:
16 Jan 2019 07:00 am
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