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पट्टा पाने के लिए एक घर से कई आवेदन

धारणाधिकार योजना: शहर में अब तक तीन हजार को लाभ

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जबलपुर . शहरी क्षेत्र में नजूल भूमि का 30 साल का पट्टा पाने की चाहत में लोग गड़बड़ी कर रहे हैं। एक ही जगह के लिए कई बार आवेदन कर दिए। जांच में ऐसे सात हजार आवेदन मिले हैं जो कि दो-दो बार किए गए हैं। एक व्यक्ति ने तो कुछ अंतराल में आठ आवेदन कर दिए थे। इन्हें तहसीलों के माध्यम से वापस कर दिया गया है। केवल मूल प्रकरण जांच में लिया गया है।

धारणाधिकार योजना के तहत शासन की ओर से लोगों को पट्टे दिए जाने हैं। शहरी क्षेत्र में इसके लिए आवेदन करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक 17 हजार 970 आवेदन अलग-अलग तहसीलों के माध्यम से जिला प्रशासन के पास पहुंचे हैं। इनकी जांच के लिए राजस्व विभाग का बड़ा अमला काम कर रहा है। सभी आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद सामने आया कि जो संख्या ज्यादा दिख रही है दरअसल वह डबलिंग के कारण है। दो-दो बार आए आवेदनों को निरस्त कर दिया गया है।

स्वीकृत से ज्यादा निरस्त

जिले में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक जो आवेदन प्राप्त हुए हैं उनमें 40 प्रतिशत का निराकरण हो गया है। उसमें 4 हजार प्रकरण निरस्त हुए हैं। वहीं 3 हजार 76 प्रकरणों में स्वीकृति मिली है । अब नियमानुसार राशि जमा कर पट्टे जारी किए जाएंगे। करीब 11 हजार प्रकरण अभी लंबित पडे़ हैं। इसमें 7 हजार वे प्रकरण भी शामिल हैं जो कि डबल हुए थे। अब प्रयास किया जा रहा है कि जल्दी से जल्दी प्रकरणों का निपटारा किया जाए ताकि लोगों को राहत मिले।

फोटो फैक्ट फाइल

- जिले में योजना के 17964 प्रकरण आए।

- 7042 आवेदनों का हुआ है निराकरण।

- 3965 प्रकरण अपात्र के कारण निरस्त।

- सबसे ज्यादा प्रकरण गोरखपुर तहसील मे।

प्रीमियम में हो गई है कमी

नए वित्तीय वर्ष से इसके प्रीमियम में भी कमी की गई है। पहले जहां पट्टे के लिए बाजार मूल्य का 5 प्रतिशत प्रीमियम देना पड़ता था, उसे शासन ने घटाकर एक प्रतिशत कर दिया है। ऐसे में लोगों को कम राशि देनी पडे़गी। यह एक तरह की टोकन मनी होती है। हालांकि रजिस्ट्री के लिए उसे 12.50 प्रतिशत राशि चुकानी पडे़गी। तब उसका नामांतरण हो सकेगा।

धारणाधिकार योजना के तहत अब तक आए प्रकरणों में 7 हजार आवेदन ऐसे मिले हैँ जो कि एक से अधिक बार किए गए है। उन्हें निरस्त कर दिया गया है। मूल प्रकरण में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

रूपेश सिंघई, डिप्टी कलेक्टर व प्रभारी धारणाधिकार योजना