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लाइव वीडियो स्टोरी: देश का सबसे मीठा मटर, वैरायटी इतनी कि देखते रह जाते हैं लोग

लाइव वीडियो स्टोरी: देश का सबसे मीठा मटर, वैरायटी इतनी कि देखते रह जाते हैं लोग  

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jabalpur Peas

जबलपुर। जब भी हरे मटर की बात आती है तो सबसे पहले जबलपुरी मटर का नाम आता है। ये इतना मीठा होता है कि इसकी एक अलग ही पहचान बन गई है। जबलपुर के आसपास के 85 किमी तक ये मटर पैदा होता है। जिसकी बिक्री जबलपुर की मंडी से ही होती है। मटर व्यापारी एवं पूर्व सब्जी मंडी अध्यक्ष इंद्रेश दुबे ने बताया कि रोजाना मंडी में हजारों बोरा मटर की आवक हो रही है। प्रत्येक बोरा में 60 से 65 किलो मटर होता है। यहां का मटर बैंगलुरू, चैन्नई, मुंबई, दिल्ली, लखनऊ समेत देश के कोने कोने में जा रहा है। शहर की बात करें तो यहां बमुश्किल 500 बोरा मटर ही बिकता है। जो कि पर्याप्त मात्रा में माना जाता है।

कृषि मंडी में हुई मटर की बम्पर आवक, वाहनों से लग रहा जाम
हरे मटर की आवक तेज होते ही विजय नगर कृषि उपज मंडी में वाहनों का जाम शुरू हो गया है। यहां प्रतिदिन 250-300 वाहन मटर लेकर आ रहे हैं। मटर की नीलामी वाले मार्ग पर लम्बा जाम लगता है। नीलामी के बाद वाहन निकलते हैं तो दमोह रोड पर यातायात बाधित हो जाता है। इस जाम से निजात पाने का उपाय नहीं मिल रहा है।

15 हजार बोरी मटर
जिले की तीनों मंडियों में प्रतिदिन 15 से 16 हजार बोरी मटर आ रहा है। इतने मटर को लाने के लिए 500 से अधिक वाहनों की आवश्यकता होती है। सबसे ज्यादा वाहन विजय नगर स्थित संभाग की सबसे बड़ी मंडी में आते हैं। शुक्रवार को 270 से अधिक वाहनों में आठ हजार बोरी से ज्यादा मटर आया।

पाटन में भी है मंडी
प्रशासन ने कृषि उपज मंडी और सहजपुर मंडी के अलावा पाटन में तीसरी मंडी शुरू किया है। यहां भी मटर की खरीदी शुरू हो गई है। लेकिन, वहां पर्याप्त संख्या में किसान नहीं जा रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण किसानों का विजय नगर मंडी के व्यापारियों से बीज और फसल की बोवनी के लिए एडवांस पैसा लेना है। वे पैसे चुकाने के लिए मटर का विक्रय यहीं करते हैं। ऐसे में पाटन में 800-1000 बोरी ही मटर पहुंंच रहा है। सहजपुर मंडी में प्रतिदिन 5 से 6 हजार बोरी मटर आ रहा है।

किसान-व्यापारी दोनों परेशान
किसान चाहते हैं कि उनका मटर जल्दी बिक जाए। दूसरी ओर व्यापारियों का प्रयास होता है कि बड़े वाहनों में मटर लोड कर दूसरे शहर या प्रदेश भेज दिया जाए। लेकिन, जाम के कारण उनकी परेशानी जस की तस बनी रहती है। मंडी से वाहन निकालने में घंटों लग जाते हैं। मंडी प्रशासन भी अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका है। ऐसे में थोक सब्जी मंडी परिसर में भारी भीड़ लग जाती है।