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कम उम्र में आ रहे इस बीमारी से पीडि़त
- 55 और 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोग पहले पीडि़त मिलते थे।
- 50 साल की उम्र में भी अब सीओपीडी से पीडि़त मिल रहे हैं।
ओपीडी में एक तिहाई मरीज सीओपीडी के
- 130-150 मरीज प्रतिदिन पल्मोनरी मेडिसिन ओपीडी में आ रहे हैं
- 40-50 मरीज इसमें परीक्षण में सीओपीडी से पीडि़त मिल रहे हैं।
(आंकड़े नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज से प्राप्त जानकारी के अनुसार)
जबलपुर। बढ़ते प्रदूषण के साथ दूषित हो रही हवा जबलपुर शहर के लोगों के फेफड़े को कमजोर कर रही है। धुआं और धूप में सांस लेने से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) की जकड़ में लोग जल्दी आ रहे हैं। शहर के अस्पतालों में प्रतिवर्ष सीओपीडी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की पलमोनरी मेडिसिन ओपीडी में श्वसन सम्बंधी समस्या लेकर आ रहे मरीजों में एक तिहाई सीओपीडी से पीडि़त मिल रहे हैं। इसमें ज्यादातर मरीजों के फेफड़ों में धुएं का बुरा प्रभाव देखने में आ रहा है। रोग की पहचान और इलाज में देरी से मरीज की सेहत को गम्भीर नुकसान पहुंच रहा है।
धीरे-धीरे बढ़ती है बीमारी
सीओपीडी के शुरुआती लक्षण काफी कुछ अस्थमा के जैसे होते है। सूखी खांसी और सांस फूलने की समस्या होती है। लेकिन, अस्थमा बीच में नियंत्रित हो जाता है। सीओपीडी अंदर ही अंदर धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। संक्रमण फैलने के साथ बार-बार जुकाम और सुस्ती महसूस होती है। बलगम के साथ खांसी आने लगती है। श्वसन सम्बंधी अन्य संक्रमण के साथ कई बार थकान, वजन कम होने के साथ पैरों में सूजन की समस्या होती है। मेडिकल कॉलेज में नए मिल रहे सीओपीडी के ज्यादातर मरीजों की धूम्रपान की हिस्ट्री मिल रही है। धूम्रपान की बढ़ती लत से ही अब कम उम्र में सीओपीडी के मरीज सामने आ रहे हैं। कुछ पीडि़त ऐसे भी हैं, जो स्वयं धूम्रपान नहीं करते, लेकिन ऐसा करने वाले दूसरे व्यक्ति के सम्पर्क में आने से सीओपीडी के घेरे में आ गए। कारखानों के धुएं, दूषित हवा और धूल में सांस लेने से भी सीओपीडी बढ़ रहा है।
एक्सपर्ट कमेंट्स
सीओपीडी के मरीज धीरे-धीरे बढ़ रहें हैं। लगभग आधे मरीज धुएं के सम्पर्क में ज्यादा रहने से सीओपीडी से पीडि़त मिल रहे हैं। इसमें धूम्रपान एक बड़ी वजह है। प्रदूषण के कारण भी सांस और फेफड़ा सम्बंधी रोग बढ़ा है। रोग बढऩे पर फेफड़े ठीक से काम नहीं कर पाते। ऑक्सीजन खींचकर कार्बन डाय ऑक्साइड को बाहर न फेंक पाने से मरीज की सेहत बिगड़ती है। सीओपीडी की समय पर जांच और उपचार आवश्यक है। इसे नियमित दवा से नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. जितेंद्र कुमार भार्गव, डायरेक्टर स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पलमोनरी मेडिसिन, मेडिकल कॉलेज
इनसे बचें
- धूम्रपान करते है तो बंद कर दें
- वाहनों के धुएं से बचें
- जहरीली गैस और रसायन के सीधे सम्पर्क में न रहें
- हवा दूषित होने पर मास्क लगाएं
- घर व आसपास सफाई रखें। पौष्टिक भोजन करें।
- फेफड़ों के अनुकूल योग करें।
- डॉक्टर से परामर्श कर नियमित दवा लें
Published on:
18 Nov 2021 08:07 pm
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