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सिद्ध पूजा: चाहते हैं दुश्मनों को मिटाना तो आज से शुरू करें इस देवी की पूजा

चाहते हैं दुश्मनों को मिटाना तो आज से शुरू करें इस देवी की पूजा

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ये देवी दुश्मनों का तत्काल कर देती हैं विनाश, इस मंत्र से होती है सिद्ध

ये देवी दुश्मनों का तत्काल कर देती हैं विनाश, इस मंत्र से होती है सिद्ध

जबलपुर। आज के ज़माने में चाहे-अनचाहे अनेक दुश्मन पैदा हो जाते हैं जो जब-तब परेशानी उत्पन्न करते रहते हैं। ऐसे शत्रुुओं के उत्पात कम करने और उन्हें काबू में करने के लिए माता बगुलामुखी का पूजन और ध्यान सिद्ध मन गया है। यूए देवी शत्रुहंता मानी जाती है। शत्रुबाधा दूर करनेे के लिए बगुलादेवी की आराधना सर्वश्रेष्ठ फल देती है।

रात को करें मंत्र जाप
ब्रम्हचारी चैतन्यानंद महाराज के अनुसार मुकदमे एवं शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के लिए मां बगलामुखी की पूजा विशेष रूप से की जाती है। यद्यपि मां बगलामुखी की पूजा से बहुत जल्दी शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं पर उनकी पूजा पूरे विधि-विधान से की जानी चाहिए अन्यथा विपरीत फल प्राप्त हो सकते हैं। कठिन मुकदमा हो या शत्रु बहुत शक्तिशाली हो तो बगुलामुखी मंत्र का 40 दिनों में 1 लाख जाप पूर्ण करें। सामान्य गृहस्थ को अपनी छोटी-मोटी शत्रुबाधा समाप्त करनेे के लिए बुधवार को रात में पूर्ण श्रद्धा से माता बगुलामुखी की पूजा करनी चाहिए, उनकी कृपा जरूर प्राप्त होगी।

पीला रंग है पसंद
पंडित दीपक दीक्षित बताते हैं कि बगलामुखी देवी को पीला रंग बहुत पसंद है। उनकी पूजा पीले कपड़े पहनकर और पीले आसन पर बैठकर करनी चाहिए। पूजा के बाद रात को बगुलामुखी "मंत्र- ऊं ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा" का ज्यादा से ज्यादा जाप करें।

धूमधाम से मना प्रकटोत्सव
सिविक सेंटर स्थित शंकराचार्य मठ में सोमवार को भगवती बगलामुखी का प्रकटोत्सव मनाया गया। बगलामुखी मंदिर में सुबह श्रृंगार एवं शाम को 11 हजार किसमिस, फलों से अर्चन किया गया। रात आठ बजे हुई महाआरती में काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
मंदिर के पुजारी ब्रम्हचारी चैतन्यानंद ने प्रवचन में कहा कि दस महाविद्याओं में अष्टम महाविद्या बगलामुखी की उपासना करने से समस्त शत्रुओं का नाश होता है, इनको वैष्णवी शक्ति भी कहते हैं। ये ब्रम्हा विद्या है। शास्त्रों के अनुसार भगवती की उपासना से प्राकृतिक आपदा ग्रह पीड़ा की निवृत्ति, शत्रु दमन एवं अभिचार आदि की निवृत्ति होती है। भोग और मोक्ष प्रदान करने वाली यह महाविद्या दस महाविद्याओं में अष्टम महाविद्या है। अष्टम तुस्तम्भिनी विद्या है।
पूजन अर्चन में भारत सिंह यादव, विनय सक्सेना, मधु यादव, प्रकाश द्विवेदी, मनोज सेन, आशुतोष दीक्षित, विजय कटारिया, बी.के. पटेल, हेमंत मिश्रा, राजेश शुक्ला, अभिषेक गुप्ता, लक्ष्मीनारायण तिवारी, विनोद मिनोचा, अखिल शरद, आदित्य सिंह, श्रीमती प्रीति अग्रवाल, नेहा गुप्ता ने प्रार्थना की।