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जबलपुर में बनेगा मप्र का पहला डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी कॉलेज, सरकार ने दी जमीन जल्द शुरू होगा काम

14 हेक्टेयर जमीन की गई आवंटित, इमलिया में खुद की थी जमीन, यहां मिलती तो होता फायदेमंद    

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Dairy Science Food Technology College in jabalpur

जबलपुर। प्रदेश में डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी कॉलेज का सपना धरातल पर अब जल्द साकार होने जा रहा है। डेयरी साइंस के लिए शासन ने मंगेली में जमीन दी है। विश्वविद्यालय को करीब 14 हेक्टेयर भूमि दी गई है। प्रदेश का यह पहला विश्वविद्यालय होगा जहां डेयरी साइंस एंड टेक्नालॉजी का पाठ्यक्रम शुरू होगा। हालांकि, मंगेली की जगह इमलिया क्षेत्र में यह जगह उपलब्ध कराई जाती, तो यह ज्यादा बेहतर होता। वेटरनरी यूनिवर्सिटी, एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के अलावा जबलपुर दुग्ध संघ का सांची का प्लांट यहीं होने से आवश्यक तकनीकी सुविधाएं और सहूलियतें आसानी से उपलब्ध होतीं।

यह है स्थिति
-14 हेक्टेयर जमीन की गई आवंटित
-2 साल से अटका था मामला
-123 करोड़ रुपए चाहिए
-3.5 लाख लीटर दूध जबलपुर में उत्पादन
-14.6 मिलियन टन दूध मप्र में उत्पादन
-12 फीसदी दूध की ही प्रोसेसिंग

प्रदेश में बढ़ रहा दूध उत्पादन
इस समय देश में 174.6 मिलियन टन दूध उत्पादित किया जा रहा है। मध्यप्रदेश में दूध का उत्पादन तेजी से बढ़ा है। प्रदेश पहले जहां छठवें स्थान पर था, अब तीसरे पायदान पर है। प्रदेश में करीब14.6 मिलियन टन दूध उत्पादित हो रहा है।

कॉलेज के लिए इमलिया होता फायदेमंद
इमलिया क्षेत्र में कॉलेज की खुद की जमीन उपलब्ध है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शासन को जमीन उपलब्धता का प्रस्ताव दिया था। जिला प्रशासन ने मंगेली में जगह प्रस्तावित कर दी। सांची दुग्ध संघ के प्लांट और मशीनरी का प्रयोग छात्रों को प्रेक्टिकल एवं अनुसंधान के लिए मिल सकता था। कृषि विवि आने वाले पशु पालक भी सीधे कनेक्ट होते।

फिलहाल बजट की राशि पर निर्णय नहीं
शासन द्वारा डेयरी साइंस एंड फूड टेक्नोलॉजी कॉलेज के लिए 123 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित है। हालांकि, राज्य शासन ने बजट में दो करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह राशि भी अब तक प्राप्त नहीं हुई है।

डेयरी साइंस टेक्नोलॉजी कॉलेज के लिए जमीन देने का निर्णय प्रशासन का है। प्रयास होगा कि इसे प्रदेश का नम्बर एक संस्थान बनाया जाए और इसका लाभ पूरे महाकोशल, अपितु देशभर को मिले। दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ ही इसकी प्रोसेसिंग आदि पर काम किया जा सकेगा।
-डॉ. पीडी जुयाल, कुलपति वेटरनरी विश्वविद्यालय