जबलपुर। महाभारतकाल में भीष्म पितामह को महायोद्धा के रूप में याद किया जाता है। युद्ध में जब अर्जुन ने भीष्म पितामह को अपने बाणों से बुरी तरह घायल कर दिया तब भी उनकी मौत नहीं हुई। भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। उन्होंने अपनी देह तभी त्यागी जब सूर्य उत्तरायण हो गए। सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इसका इतना महत्व क्यों हैं, भीष्म क्यों शर शैया पर भीषण दर्द सहते हुए भी सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा करते रहे, इस संबंध में पौराणिक ग्रंथों में विस्तृत विवरण दिया गया है। गीता में भी सूर्य उत्तरायण की अहमियत बताई गई है।