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महालक्ष्मी पूजन: मात्र सोलह बार पढ़ें ये छोटा सा मंत्र… झोली भर देंगी मां लक्ष्मी

2 अक्टूबर को होगी महालक्ष्मी की पूजा

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mahalalaxmi vrit pujan vidhi in hindi

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जबलपुर। सामान्य तौर पर पितृपक्ष में पुरखों को प्रसन्न करने के तर्पण और अनुष्ठान किया जाता है, लेकिन इसी पक्ष में महालक्ष्मी व्रत करने का भी विधान है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि इसके लिए प्रतिष्ठित की गई है। इस बार अष्टमी तिथि 2 अक्टूबर को है। इस दिन हर घर में मां महालक्ष्मी की पूजा की जाएगी। ज्योतिर्विदों के अनुसार महालक्ष्मी व्रत में महिलाएं निराहार व्रत करके सुख समृद्धि की कामना करती हैं। परम्परा के अनुसार मिट्टी की हाथी पर विराजमान भगवती लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है। इस व्रत को जीवित पुत्रिका व्रत भी कहा जाता है।

16 का संयोग
ज्योतिर्विद जनार्दन शुक्ला ने बताया, महालक्ष्मी व्रत 16 दिन का है। कुछ महिलाएं भाद्र पद शुक्ल पक्ष अष्टमी को व्रत की शुरूआत करती हैं और आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी को व्रत पूर्ण होता है। जबकि, कुछ महिलाएं एक दिन निराहार व्रत रहकर सायंकल देवी लक्ष्मी का जल से तर्पण व पूजन करती हैं। सायंकाल 16 दीप जलाकर वे 16 गठान का धागा बांधती है एवं सुनो सुनो लक्ष्मी महारानी सोलह बोल की एक कहानी... मंत्र को 16 बार पढ़कर पूजन करती है। ज्योतिषाचार्य पं. शुक्ला का कहना है कि इस दिन ऊं गजलक्ष्मै नम: मंत्र का 16 बार जाप करने से ही मां महालक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और इच्छित वर प्रदान करती हैं।

तैयारियां प्रारंभ
इस व्रत के लिए घरों में तैयारियां शुरू हो गई है। धार्मिक परम्परा के अनुसार महालक्ष्मी पूजन की सामग्री जुटाई जा रही है। जबकि, व्रत की पूर्व संध्या पर ही हाथी एवं लक्ष्मी जी की प्रतिमा और पूजन सामग्री की दुकानें सज जाएंगी। शहर के बड़े फुहारा, मदन महल, छोटी लाइन फाटक, ग्वारीघाट, त्रिपुरी चौक, गढ़ा एवं विजयनगर में दुकानें लगाई जा रही हैं। यहां से गज लक्ष्मी की प्रतिमाओं की खरीदी भी शुरू हो गई है।

महाभारत काल से की जा रही है पूजा
जनश्रुति के अनुसार महाभारत काल में रानी गांधारी ने मिट्टी के हाथी बनाकर जीवित पुत्रिका व्रत किया था। कुंती ने इसी व्रत को किया था, पूजन में इंद्रासन से एरावत हाथी आया था। उस समय से सुख समृद्धि एवं संतान की उन्नति के लिए महालक्ष्मी की पूजा की जा रही है। जीवित पुत्रिका व्रत करने से मां संतति की भी रक्षा करती हैं।