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जबलपुर. पुराना दौर शायद सभी को याद होगा जब सुपर मारियो, एडवेंचर्स आइलैंड, टेटरिस, ज्वैल थीफ, आर्ची, टर्टल जैसे कई गेम्स टीवी स्क्रीन पर घंटों खेला करते थे। समय थोड़ा बदला और सागा गेम्स में कैसेट्स गेम्स की जगह ले ली। इसके बाद फिर पीएस-1, पीएस-2 से शुरू हुआ सफर पीएस-7 तक पहुंच गया, लेकिन लोगों के गेमिंग का रोमांच खत्म नहीं हुआ। अब यही गेम्स लोगों को टीवी और एलइडी स्क्रीन से निकलकर मोबाइल स्क्रीन पर मिल रहे हैं। इतना ही नहीं अब यह गेमिंग सीरीज लोगों के लिए लाइव गेमिंग एक्सपीरियंस तक पहुंच चुकी है।
बच्चों के साथ यंगस्टर्स को भी पसंद
शहर में मोबाइल गेम्स खेलने में बच्चों के साथ-साथ यूथ की संख्या ज्यादा है। इसके साथ-साथ महिलाएं भी गेम खेलने में अधिक इंटरेस्ट दिखा रही हैं। फ्री टाइम में वे सबसे ज्यादा अलग-अलग गेम को खेलना पसंद कर रही हैं। इसमें वे कैंडी क्रश, फार्म सागा और टॉम एंड टॉम भी खेलना पसंद कर रही हैं।
युवाओं को भाया लाइव ट्रेंड
सिटी में यूथ को सिर्फ ऑनलाइन गेम्स ही पसंद आ रहे हैं। अभी युवाओं में पबजी को लेकर काफी क्रेज है। जिसे देखा हर किसी के मोबाइल पर सिर्फ पबजी नजर आ रहा है। इसके साथ ही युवाओं को क्लैश ऑफ द क्लैन जैसे गेम्स हैं, जो कि ऑनलाइन ही ग्रुप बनाकर खेले जा रहे हैं।
गेम को गेम ही रहने दे
काउंसलर निधि जैन का कहना है कि प्ले स्टोर पर मौजूद सभी गेम्स सिर्फ लोगों के मनोरंजन के लिए बनाए गए हैं। कई बार यह देखने में आता है कि लोग सभी काम भूलकर सिर्फ मोबाइल गेम्स में लगे रहते हैं। इससे उनमें शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से परिवर्तन आते हैं। कई गेम्स ऐसे हैं जिसकी वजह से युवा और बच्चों मेें हिंसक प्रवृत्ति भी देखी जाती है। ऐसे में गेम खेलने के लिए भी लिमिट सेट करनी चाहिए, ताकि गेम दिमाग पर हावी न हो पाए।
Published on:
09 Jul 2019 10:10 am
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