
Jabalpur High Court
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अनूपपुर में रेत खनन ठेकेदार द्वारा अनुबंध के विपरीत मनमानी के आरोप के मामले को गंभीरता से लिया। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने जनहित याचिका में स्टेट माइनिंग कार्पोरशन को आवश्यक पक्षकार बनाने के निर्देश दिए। इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। अनूपपुर निवासी अजय मिश्रा की ओर से अधिवक्ता ब्रहमेंद्र पाठक ने कोर्ट को बताया कि 2020 में केजी डेव्लपर्स को तीन साल के लिए रेत खनन का ठेका 13 करोड़ 63 लाख प्रतिवर्ष के हिसाब से दिया गया था। इस संबंध में स्टेट माइनिंग कार्पोशन से अनुबंध हुआ था। लेकिन ठेकेदार ने बाद में संतोष सिंह नामक व्यक्ति के साथ 38 करोड़ प्रतिवर्ष के हिसाब से उपठेका का अनुबंध कर लिया, जो कि नियमानुसार अनुचित था। एक माह बाद फायदा देखकर ठेकेदार ने संतोष सिंह से अनुबंध समाप्त भी कर दिया। लेकिन इस बीच संतोष सिंह ने भी कई उप ठेकेदार बनाकर रुपये एकत्र कर लिए थे। इस अनियमितता की शिकायत जनहित याचिकाकर्ता ने जिम्मेदार विभागों से की।लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नही की गई। इस पर हाई कोर्ट की शरण ली गई, क्योंकि अवैध खनन बेरोकटोक जारी है। जबकि माइनिंग राजस्व विभाग ने छापा मारा था और हैवी मशीनरी जप्त की थी। हैवी मशीनरी का उपयोग प्रतिबंधित होने के बावजूद नदी की जलधारा के बीच से अवैध रेत खनन जारी है। याचिका में इस अवैध रेत खनन पर लगाम लगाने के लिए सख्त निर्देश जारी करने का आग्रह किया गया। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेंद्र यादव ने जनहित याचिका में स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन को पक्षकार न बनाए जाने की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया। इस पर कोर्ट ने कॉरपोरेशन को भी पक्षकार बनाने के निर्देश जारी किए ।
Published on:
10 Jul 2021 07:17 pm
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