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जबलपुर। पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए सीड बॉल (सीड बम) मददगार होंगे। कृषि विज्ञान केंद्र ने प्रायोगिक तौर पर तीन हजार सीड बॉल का निर्माण किया है। इन्हें किसानों को वितरित करने के साथ ही उन्हें इसके निर्माण के लिए प्रोत्साहित और प्रशिक्षित किया जा रहा है। मानसूनी सीजन में इनका उपयोग ऐसे स्थान पर किया जाएगा, जहां पर पहुंचना और गड्ढे करना सम्भव नहीं हो पाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र की अभिवन पहल
प्रयोग के तौर पर तीन हजार सीड बॉल किए गए तैयार, लाभार्थियों को दे रहे प्रशिक्षित
पौधरोपण का बेहतर विकल्प- पौधरोपण के लिए नर्सरी में बीज लगाने, पौधों की देखरेख करने और गड्ढा कर पौधे रोपने में सरकार को हर साल करीब 60-70 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं। सीड बॉल इसका बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इन्हें केवल पौधरोपण वाले स्थान पर छोडऩा होगा। ये स्वत: ही पौधों का रूप ले लेंगे। पहाड़ी क्षेत्र, ढलान वाले इलाके, बंजर भूमि आदि में भी इनका उपयोग किया जा सकेगा।
एक से दो बीजों की बॉल
एक सीड बॉल में 1 से 2 बीज रखे गए हैं। मिट्टी, गोबर की खाद से तैयार सीड बॉल जमीन में केंचुआ, खाद और पानी के सम्पर्क में आते ही तेजी से पौधों का रूप लेने लगते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र में मुनगा, जामुन, बेर, बांस, नीबू, अनार, इमली के सीड बॉल तैयार किए गए हैं।
ये हैं फायदे
पौधरोपण में आसानी और खर्च भी कम
दुर्गम क्षेत्रों में जाने की जरूरत नहीं
गुलेल के जरिए पौधरोपण वाले स्थान पर फेंके जा सकते हैं
सीड बॉल पौधरोपण का बेहतर विकल्प हैं। हमने विभिन्न प्रजातियों के पौधों के सीड बॉल तैयार किए हैं। इन्हें किसानों को देने के साथ ही प्रशिक्षित भी कर रहे हैं, जिससे वे खुद ही सीड बॉल तैयार कर पर्यावरण को संरक्षित कर सकें।
- डॉ. एके सिंह, वैज्ञानिक, कृषि विकास केंद्र जबलपुर
Published on:
09 Jul 2021 10:29 am
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