
malmas 2018 date starting from 16 may to 13 june in hindi
जबलपुर। तीन साल में एक बार आने वाला मलमास 16 मई से शुरू हो रहा है, जो 13 जून तक रहेगा। ज्योतिषों और जानकारों का कहना है, इस दौरान मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे। इसमें शादी, उपनयन आदि कार्यक्रम शामिल हैं। अध्यात्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने वाले इस कालखंड में केवल पूजन, कथा श्रवण जैसे कार्यों को श्रेष्ठ माना गया है। ज्योतिषाचार्यों की मानें तो इस मास में किया गया पूजन किस्मत को खोलने वाला होता है। साथ ही धन धान्य से घर भर जाता है। विष्णु प्रिय मास होने से माता लक्ष्मी की कृपा सभी राशि के जातकों पर बरसती है।
about- मलमास 16 से : 13 मई के बाद एक महीने तक नहीं हैं विवाह मुहूर्त , एक महीने तक नहीं हो सकेंगे मांगलिक कार्य
भारतीय काल गणना के मुताबिक इस बार मलमास ज्येष्ठ मास में आ रहा है। इस वर्ष दो ज्येष्ठ मास होंगे। इसके पहले २०१५ में मलमास के दौरान आषाढ़ था और वो भी दो थे। ऐसी भी मान्यता है कि इस दौरान नवविवाहित जेठी बेटी का विदा नहीं लौटती है। यानि वह अपने मायके नहीं जा सकती।
आध्यात्मिक कारण-
मलमास को अध्यात्म के लिए काफी अहम माना जाता है। इसके पीछे पौराणिक कथा का आधार बताया जाता है। कहा जाता है, प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप ने तप के बाद भगवान से वरदान मांगा था कि उनकी मृत्यु किसी भी मास में न हो। चूंकि मृत्यु एक सत्य है, इसलिए देवताओं को इस बात की चिंता हुई। फिर एक अन्य मास का निर्माण किया गया। इस मास को पूजा-पाठ और कथा श्रवण के लिए श्रेष्ठ बताया गया। अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालु जन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं।
दान-पुण्य से मिलता है आध्यात्मिकसुख-
ज्योतिषविद् पं. जनार्दन शुक्ल के मुताबिक मलमास के दौरान दान-पुण्य के कार्य किए जाने से आध्यात्मिक सुख की प्राप्ति होती है। इस समय पूजा-पाठ का महत्व ज्यादा माना जाता है। जबलपुर व आसपास के क्षेत्रों के लोग नर्मदा में स्नान पूजन कर दान पुण्य करते हैं। ऐसा करने से उनकी दरिद्रता दूर होती है, साथ में जीवन में आग रूपी कष्टों का क्षरण होता है।
हर तीन साल में आता है अधिकमास-
वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार भारतीय हिंदू कैलेंडर सूर्य मास और चंद्र मास की गणना के अनुसार चलता है। अधिकमास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घटी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है, जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है, जिसे अतिरिक्त होने के कारण अधिकमास का नाम दिया गया है।
इसलिए पड़ा मल मास नाम
हिंदू धर्म में अधिकमास के दौरान सभी पवित्र कर्म वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत, विवाह और सामान्य धार्मिक संस्कार जैसे गृहप्रवेश, नई बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदी आदि आमतौर पर नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है।
Published on:
03 May 2018 01:31 pm
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