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एक माह पहले बौर से लदे आम के पेड़

आम्रमंजरियों में बहार आ गई है, बौर से आम के पेड़ लद गए हैं। लेकिन, चिंता की बात है कि ऐसा मौसम का धोखा होने से है। इसके चलते आम में एक माह पहले ही बौर आ गए हैं। वैज्ञानिक इसकी वजह असामान्य रूप से तापमान के बढ़ने को मानते हैं, जिसका असर आम के उत्पादन पर पड़ सकता है।

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Mango trees blossomed a month ago

Mango trees blossomed a month ago

जबलपुर। आम्रमंजरियों में बहार आ गई है, बौर से आम के पेड़ लद गए हैं। लेकिन, चिंता की बात है कि ऐसा मौसम का धोखा होने से है। इसके चलते आम में एक माह पहले ही बौर आ गए हैं। वैज्ञानिक इसकी वजह असामान्य रूप से तापमान के बढ़ने को मानते हैं, जिसका असर आम के उत्पादन पर पड़ सकता है। रोग लगने का खतरा भी बढ़ गया है।

उद्यानिकी से जुड़े वैज्ञानिकों की मानें तो आम में बौर आने की प्रक्रिया जनवरी के आखिरी चरण से शुरू होती है। फरवरी के अंत तक आम की डालियां फूलों (बौर) से लद जाती हैं। इस साल ठंडी की विदाई पहले हुई और जलवायु में आए इस बदलाव के चलते बौर जनवरी के शुरुआत से आने लगे थे, जो अब पेड़ों को पूरी तरह से ढंक लिया है।

शिव को चढ़ाते हैं बौर
मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को बौर और गेहूं की बाली चढ़ाने से समृद्धि आती है और फसल अच्छी होती है। लेकिन, तब तक बौर के अंश ही निकले होते हैं। महाशिवरात्रि पर्व 18 फरवरी को है और आम बौर से लदे हैं। मौसम वैज्ञानिकों की मानें, तो ऋतु परिवर्तन का चक्र दक्षिण से उत्तर की ओर आता है। इसकी शुरुआत केरल से होती है। सबसे पहले वहां आमों में बौर आते हैं।

मकर संक्रांति से ही बदल गया मौसम
महाकोशल का मौसम मकर संक्रांति के बाद ही बदल गया। अधिकतम तापमान चढऩे लगा। न्यूनतम तापमान में भी उछाल देखा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार जैसे ही दिन का तापमान 20 डिग्री पार करता है, पेड़ों को ठंड बीत जाने का धोखा होने लगता है। ऐसा ही आम के साथ हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार 25 से 28 डिग्री तापमान आम के पेड़ में बौर आने के लिए अनुकूल होता है। तापमान बढऩे से पौधों में रासायनिक परिवर्तन के कारण वृद्धि कलिका का परिवर्तन पुष्प कलिका में हो जाता है।

किसानों को सलाह
पेड़ों में समय से पहले आने के साथ बौर घने भी हैं। उद्यानिकी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भभूतिया रोग लगने का खतरा है। इस रोग में बौर झडऩे लगते हैं। इसे देखते हुए पौधों में एक लीटर पानी में डेढ़ से दो ग्राम घुलनशील सल्फर मिलाकर 10 से 15 दिन में दो बार स्प्रे करने की सलाह दी जा रही है। इसके साथ ही कीट के रस चूसने पर भी बौर गिर जाते हैं। इसे देखते हुए क्लोरोपायरीफास डेढ़ से दो मिलीग्राम का प्रति लीटर मिश्रण कर छिड़काव करना कीटों से बचाव के लिए कारगर होगा।

ठंड के मौसम में अचानक तापमान बढ़ने से हुए रासायनिक परिवर्तन के कारण आम के पेड़ों में वृद्धि कलिका के पुष्प कलिका में परिवर्तित होने से ही समय से पहले बौर आ गए हैं।
डॉ. एसके पांडे, विभागाध्यक्ष, उद्यानिकी, कृषि विश्वविद्यालय