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मेडिकल में बैठी संसद, MBBS की अवधि कम करने के प्रस्ताव चर्चा, जानिए पूरा मामला

एमबीबीएस के करिकुलम में पहला पार्ट प्रैक्टिकल बेस और दूसरा फेज मेजर हिस्ट्री और थ्योरी पर फोकस करने पर विचार

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जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को युवा संसद बैठी। इसमें कॉलेज के एमबीबीएस के स्टूडेंट्स ही सत्ता और विपक्षी पार्टी के सांसद, मंत्री और सदन के अध्यक्ष बनें। इस मंचन में एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं ने बिल्कुल संसद की तरह युवा संसद का संचालन किया। छात्रों द्वारा मेडिकल एजुकेशन रिफॉर्म बिल को प्रस्तुत कर चिकित्सा शिक्षा से जुड़े बेहद गंभीर मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। रिफॉर्म के समर्थन और उसके खिलाफ में किए गए छात्रों के तार्किंक सवाल और जवाब ने इस आयोजन को बेहद दिलचस्प बना दिया। मेडिकल कॉलेज में आयोजित इस युवा संसद के कार्यक्रम में प्रोफेसर्स, डॉक्टर्स के साथ ही एमबीबीएस के स्टूडेंट्स शामिल हुए।

ऐसे हुई कार्यवाही की शुरुआत
'माननीय अध्यक्ष महोदय अपनी आसंदी पर पधार रही हैं। सभी सदस्यों से अनुरोध है कि अपने स्थान पर खड़े हो जाएं।Ó अध्यक्ष ने कहा कि 'अब रूलिंग पार्टी अपने बिल की प्रस्तावना पेश करें। 'माननीय अध्यक्ष महोदय मेडिकल बिल का पहला क्लॉज है कि एमबीबीएसस पूरे ५.५ साल में पूरा होता है। इस टाइम को कम करके ५ साल किया जाना चाहिएÓ कुछ एेसे ही अन्य और गंभीर मुद्दे इस युवा सदन में उठाए गए।

इस प्रकार निभाई विपक्ष की भूमिका
विपक्ष की सांसद आकृति अग्रवाल ने कहा कि इस बिल में एमबीएसएसी की पढ़ाई छह महीने कम करने की बात कही है। क्या इससे छह माह में जो सीख मिलती है, उसका पोटेंशियल कम नहीं होगा, क्या वह केपेबल डॉक्टर बन पाएगा। मेडिकल की पढ़ाई में एक-एक मिनट के एक्सपीरियंस की कीमत है।

परीक्षा में विकेंद्रीयकरण केंद्रीयकरण की नीति
रूलिंग पार्टी ने कहा कि मेडिकल एंट्रेंस टेस्ट अपने-अपने स्टेट बोर्ड को करवा चाहिए, वहीं विपक्ष ने कहा कि केंद्रीयकरण अपनाते हुए सिंगल एग्जाम ही बेहतर है। अलग-अलग एग्जाम होने से स्टूडेंट्स के ऊपर हर तरह के एग्जाम तैयार करने की टेंशन बनी रहती है। रूलिंग पार्टी ने स्मार्ट एजुकेशन को मेडिकल क्षेत्र में लाने का बिल रखा। विपक्ष ने कहा कि चिकित्सकीय शिक्षा स्मार्ट बोर्ड के डब्बे से नहीं चल पाएगी। इसके लिए टीचर ही सही उपाय है। पक्ष ने कहा कि शिक्षा को बेहतर बनाने की बात की जा रही है न की टीचर को हटाए जाने की।

हॉरिजेंटल क्लॉज में भी थ्योरी
रूलिंग पार्टी ने कहा कि एमबीबीएस का करिकुलम नए तरह से बनना चाहिए, जिसे दो फेज में बांटा। कहा कि पहला फेज पूरा प्रैक्टिकल बेस होगा और दूसरा फेज मेजर हिस्ट्री, थ्योरी बेस होना चाहिए। विपक्ष के प्रतिनिधि ने कहा कि जिस तरह का कोर्स आपने सुझाया है, वर्तमान में भी इसी पर फोकस किया जा रहा है। आप कह रहे हैं प्रैक्टिकल पर फोकस किया जाएगा, लेकिन आपके हॉरिजेंटल क्लॉज में भी थ्योरी-थ्योरी की बात है।

20 भावी डॉक्टर हुए शामिल
युवा संसद मंचन में २० स्टूडेंट्स शामिल हुए। स्पीकर की भूमिका पल्लवी घोष ने निभाई। रूलिंग पार्टी में सांसदों की भूमिका अस्तुत कुररारिया, अदिति तिवारी, पलक बंसल, साक्षी अडाना, हर्षद शर्मा, रश्मि मिश्रा, शुभम जैन, पलक श्रीवास, अनुज जैन ने निभाई। विपक्ष की भूमिका में आरती यादव, आकृति, उर्वशी मोटवानी, अंकित बोहरे, हर्षवर्धन सिसोदिया, मासूम जैन, प्रांजल, आयुषी, आदीश्वर, ऋषभ रहे।