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मेडिकल यूनिवर्सिटी पहले से भी सुर्खियों में रही है। परीक्षा के आयोजन से लेकर परिणाम में मनमानी और मूल्यांकन में धांधली के खूब किस्से सामने आए। यहीं के एक प्राध्यापक पर किस्मत के बदले अस्मत मांगने का मामला आया था। जिसपर कार्रवाई हुई थी। अब नियम विरुद्ध पदस्थापना को लेकर चर्चा में है। बताया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शोध छात्रा को संकायाध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव राज्यपाल के कार्यालय भेजा था। तब उसे सीनियर फैकल्टी बताया गया था। राजभवन ने इसका अनुमोदन कर दिया। जैसे ही शोध छात्रा ने चार्ज लिया तो बवाल खड़ा हो गया।
राजभवन पहुंची शिकायत
मामले की शिकायत मध्यप्रदेश छात्र संघ ने राज्यपाल ऑफिस में की और बताया कि धोखे रखकर यह नियुक्ति कराई गई है। राजभवन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए तो अब विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए हैं।
कार्रवाई की मांग
मप्र छात्र संघ ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति मंगुभाई पटेल को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि शोध छात्राको तत्काल नर्सिंग संकायाध्यक्ष पद से हटाया जाए। वरिष्ठता सूची के अनुसार नर्सिंग के प्रोफेसर को संकायाध्यक्ष नियुक्त करें। छात्रसंघ ने कुलसचिव डॉ. पुष्पराज सिंह बघेल पर भी कार्रवाई की मांग की है। मप्र छात्रसंघ अध्यक्ष अभिषेक पांडे के अनुसार स्टेला पीटर प्रोफेसर के पद पर नहीं हैं। वे एमयू से पीएचडी कर रही हैं।
वर्जन
स्टेला पीटर की नर्सिंग संकायाध्यक्ष पद पर नियुक्ति राजभवन से की गई है। वह मेडिकल कॉलेज के नर्सिंग कॉलेज में सीनियर फैकल्टी है। पीएचडी करने को लेकर यूनिवर्सिटी से तथ्य छुपाने के मामले में उसे नोटिस दिया गया है।
डॉ. पुष्पराज बघेल, रजिस्ट्रार, मेडिकल यूनिवर्सिटी
Published on:
02 May 2023 09:02 pm
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