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जबलपुर। कहने को तो जबलपुर के सर्किट हाउस में चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग की जनप्रनिधियों के साथ बैठक हो रही थी। कई महत्वपूर्ण मुद्दे कहे जाने थे। सुने जाने थे। लेकिन, इस बैठक के दौरान विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। कांग्रेस विधायक संजय यादव और विनय सक्सेना हॉल में पहुंचे, उस समय मंत्री सारंग भाजपा विधायक, नेता एवं अन्य लोगों से कमरे में चर्चा कर रहे थे। विधायक द्वय ने संदेश भिजवाया कि वे बैठक में शामिल होंगे। लेकिन, विलंब होने के कारण वे सीधे उस कक्ष में चले गए, जहां मंत्री चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बैठक में नहीं बुलाने पर नाराजगी जताई। विधायकों ने कहा, शहर में बिगड़ते हालात को देखते हुए यदि बैठक भाजपा नेताओं के साथ थी तो प्रशासन की ओर से उन्हें सूचना क्यों नहीं दी गई? हालांकि बाद में बात संभली। मंत्री ने उन्हें बैठाया। मंत्री ने बात सम्भाल ली। यह अच्छी बात है, लेकिन इस तरह की स्थिति बनी कैसे, इसका जवाब तो हर कोई मांग रहा है।
जबलपुर में कांग्रेस कई मुद्दों पर भाजपा और जिला प्रशसान को घेर रही है। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस नेता यदि एकजुट को होकर मुद्दों को उठाएं, तो उसके साथ शहर के आम लोग भी आ सकते हैं। क्योंकि, कोरोना के मामले में जिला प्रशासन का पूरी तरह फेल हो जाना हर किसी को दिख रहा है। लेकिन, कांग्रेस की समस्या यह है कि उसके नेता गुटों में बंटे हुए हैं। जिला इकाई में सक्रिय कुछ नेताओं ने निजी चिकित्सालयों की लूट का मामला उठाया, तो सभी नेता मैदान में नहीं उतरे। कांग्रेस के दो विधायक बीमारी से जूझ रहे हैं। इसका असर भी पार्टी के आंदोलनों पर पड़ रहा है। उधर, भाजपा भी मुद्दों को सही ढंग से हल नहीं कर रही है। अब मंत्री की बैठक में कांग्रेस के विधायकों को नहीं बुलाकर खुद ही उन्हें मौका दे दिया। इससे आम लोगों में संदेश गया कि भाजपा कोरोना के मुद्दे पर भी सबसे चर्चा नहीं करना चाहती।
Published on:
24 Sept 2020 09:22 pm
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