
Big News :
जबलपुर
. एक शिक्षक, दार्शनिक एवं विचारक के रूप में देश दुनिया विख्यात रहे आचार्य रजनीश की यादें आज भी शहर में जीवित है। किताबें ओशो की बेहतरीन मित्र थीं।
लायब्रेरी में घंटो बैठकर किताबें पढा करते थे। आज भी लायब्रेरी का यह कक्ष आशो की अनुभूति कराता है। यहां बात हो रही है शासकीय ऑटोनॉमस कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की। कॉलेज की लायब्रेरी में ओशो की यादों को सेहजकर रखा गया है। छात्र यहां आकर ओशो के नजदीक होने का अनुभव करते हैं। संस्कारधानी ओशो की कर्मस्थली और तपोस्थली के रूप में भी जानी जाती है।
छायाचित्र सुरक्षित
महाकोशल कॉलेज के ग्रंथालय में ओशो की गोल चेयर आज भी मौजूद है। इस चेयर को कॉलेज प्रबंधन ने विभिन्न छाया चित्रों के साथ सुरक्षित रखा है। उनके हस्ताक्षर आज भी उक्त रजिस्ट्रर के पन्ने में हैं जिसे सम्भालकर रखा हुआ है।
चुपके से पहुंचते छात्र
ओशो फिलासिफी के प्रोफेसर थे। उनकी कक्षाएं कॉलेज के फर्स्ट फ्लोर पर लगती थीं।
उन्होंने कॉलेज में नौ साल तक अध्यापन कराया। उनकी पढ़ाने की शैली बहुत ही सम्मोहक थी। इसके चलते उनकी क्लास में कोई भी छात्र नागा नहीं करता था। उनके लैक्चर सुनने के लिए दूसरी कक्षाओं के छात्र भी लालायित रहते थे। वे चुपके से उनके कमरे के बाहर खड़े होकर सुनने का प्रयास करते थे।
कहते हैं प्रोफेसर
कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. अरुण शुक्ला कहते हैं कि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आत्मा यहां बसी हुई है। लायब्रेरी में प्रवेश करते ही मेडिटेशन का अनुभव होने लगता है, जो कि उनकी मौजूदगी को दर्शाता है। डॉ. मधुर तिवारी, डॉ. टीआर नायडू कहते हैं कि वे गौरवान्वित हैं कि इसी कॉलेज में महान दार्शनिक आचार्य रजनीश भी पढ़ाते थे।
Published on:
09 Dec 2022 08:21 pm
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
