
Rape
जबलपुर। देश में बढ़ रहीं रेप की घटनाओं ने प्रदेश व केन्द्र सरकारों की नींद उड़ा रखी हैं। जितनी सख्ती हो रही है, उतने ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। वहीं पुलिस इन मामलों तत्परता दिखाते हुए आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर मामला बना रही है। साथ ही आरोपियों को जेल की हवा भी खिलवा रही है। ऐसे ही दो मामलों में गुरुवार को हाईकोर्ट के सामने पेश हुए। जिनमें अलग अलग फैसले सुनाए गए। पहला मामला नौ साल की नाबालिग से जुड़ा है। वहीं दूसरा सवा दो साल की बच्ची से रेप का है।
news acts- सागर जिला अदालत ने सुनाया था मृत्युदंड
हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास में बदली दुष्कर्मी की फांसी
मप्र हाईकोर्ट ने सागर जिले में नौ साल की बालिका का अपहरण कर उससे दुष्कर्म करने के अपराधी को जिला अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने मामले को विरल से विरलतम मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अपराधी ने अक्षम्य कुकृत्य किया, लेकिन फांसी की सजा के लिए मामले के तथ्यों, साक्ष्यों को कई कसौटियों पर परखा जाता है। इन कसौटियों पर जिला अदालत सागर का आदेश खरा नहीं उतरा। 21 मई 2018 को रहली थाना के तहत 9 वर्षीय बालिका को धर्मस्थल में ले जाकर दुराचार करने का मामला सामने आया था। रिपोर्ट दर्ज कराने आई पीडि़ता की मां ने बताया था कि 21 मई को भग्गी उर्फ नारायण उर्फ भगीरथ पटेल (40) ने एक धर्मस्थल में ले जाकर बच्ची से दुराचार किया। बच्ची की चीख सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों को देखते ही आरोपित भाग निकला। आरोपित के खिलाफ पॉक्सो एक्ट सहित दुष्कर्म का मामला पंजीबद्ध किया गया था। इसे फास्ट ट्रैक कोर्ट में रखा गया।
और यहां फांसी पर फैसला सुरक्षित
हाईकोर्ट ने मृत्युदंड से दंडित किए गए सवा दो साल की मासूम से दुष्कर्म के अपराधी की अपील व दंडादेश की पुष्टि के लिए छतरपुर जिला अदालत की ओर से प्रेषित रेफरेंस पर सुनवाई पूरी कर ली। जस्टिस एसके सेठ व जस्टिस अंजुलि पालो की डिवीजन बेंच ने गुरुवार को अंतिम रूप से दोनों पक्षों के तर्क सुने। इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया।
Published on:
12 Oct 2018 01:40 pm
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