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शरीर के आर पार हो गए सैकड़ों त्रिशूल, नहीं निकला एक बूंद खून, वीडियो में देखें देवी का चमत्कार

शरीर के आर पार हो गए सैकड़ों त्रिशूल, नहीं निकला एक बूंद खून, वीडियो में देखें देवी का चमत्कार

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most dangerous and horrific devi puja of india

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जबलपुर। बड़े बड़े बानों को गालों में छिदाकर जब वे गलियों से गुजरे तो देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। दीवाला की निशानी, धूमावती माता के प्रतीक चिह्नों पर जब पंडों से शूलों के बीच धूनी रमाई तो लोग अपलक देखते ही रह गए। अपनी आन-बान और शान के साथ निकले बूढ़ी माई के जवारा विसर्जन जुलूस को देखने हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। जगह-जगह माता के भक्तों ने स्वागत मंच लगाकर पुष्प वर्षा की और भंडारा, प्रसाद का वितरण किया। जवारा घटों को सिर पर रखे हुए महिलाएं, युवतियां व कन्याएं माता के भाव में झूमते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ रहीं थीं। सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस बल मौजूद था।

चेहरे पर जरा सी सुई भी चुभ जाती है तो खून निकल आता है, लेकिन 4 से 6 एमएम मोटी नुकीली लोहे की सरिया से बने 'बाना' गाल के आर-पार हो जाते हैं और ख्ूान की एक बूंद भी नहीं टपकती। यही नहीं इसका निशान भी गाल पर नहीं पड़ता है। बल्कि बाना छिदवाने वाले की हर मुराद पूरी हो जाती है। जी हां, ये सच है। धूमावती स्वरूप मां बूढ़ी खेरमाई माता के जवारा विसर्जन जुलूस में ऐसा नजारा देखा जा सकता है। जब माता का दिवाला शान के साथ नगर भ्रमण पर निकलता है तो देखने वालों की भीड़ उमड़ पड़ती है।

बाना आस्था का माध्यम
बूढ़ी खेरमाई समिति के आनंद मोहन पाठक ने बताया कि बाना माता के प्रति अपनी आस्था प्रकट करने का प्रतीक है। बूढ़ी खेरमाई के जवारा विसर्जन जुलूस में प्रत्येक वर्ष 700 से 800 भक्त बाना छिदाकर अपनी आस्था प्रकट करते हैं। इनमें 3 साल के बच्चे से लेकर 50 साल के वयस्क व्यक्ति शामिल होते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता का बाना छिदवाने से हर मुराद पूरी हो जाती है, यही वजह है कि साल-दर-साल बाना छिदवाने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। वहीं जिनकी मुराद पूरी हो जाती है वे भी बाना छिदाते हैं।

एक बाना में एक दर्जन
बूढ़ी माई का एक बाना बहुत खास है, जिसमें एक दर्जन भक्त एक साथ उसे छिदवाकर चलते हैं। इस बाना को देखने लोगों में होड़ मच जाती है। इसके अलावा भारी भरकम व बड़े बाने भी जनाकर्षण का केन्द्र रहते हैं। जवारों के घट भी मन्नतों के अनुसार बोए जाते हैं।

राजा कोकल्यदेव ने बनवाया था मंदिर
चारखंबा स्थित बूढ़ी खेरमाई मंदिर कल्चुरिकालीन राजा कोकल्यदेव ने बनवाया था। ऐसी मान्यता है कि यहां पूजन करने से मनोकामना पूर्ण होती है। यह स्थान सदियों से सनातन धर्मावलंबियों के आस्था का केन्द्र है।1980 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। नवरात्रि के दौरान उपासना के लिए मंदिर में सैकड़ों की संख्या में भक्त परिवार सहित पहुंचते हैं।

सड़कों की धुलाई
बूढ़ी खेरमाई मंदिर से जवारा जुलूस के आगमन से पहले लोगों ने अपने घरों के सामने सड़कों की धुलाई कर दी थी तो पुष्प और नारियल के साथ मां की झांकी की प्रतीक्षा करते रहे। बाना का दृश्य देखने के लिए महिलाएं छतों पर खड़ी रही। भक्तों के सैलाब के कारण 17 डायवर्सन प्वाइंट से वाहनों को दूसरे रूट पर मोड़ा गया। इस दौरान यातायात व्यवस्था सम्हालने में पुलिस को पसीना आ गया। जवारा से पहले मां का चांदी का छत्र था जबकि कई जवारा कलश पर भी चांदी का छत्र लगा हुआ था। जवारा जुलूस नया पुल, मछली मार्केट, सूजी मोहल्ला, पंचशील टाकीज, छोटा फुहारा, हितकारिणी स्कूल तिराहा होते हुए हनुमानताल पहुंचा।