
movie makers to shoot many projects in jabalpur
जबलपुर. लाइट-कैमरा-एक्शन- संस्कारधानी में आजकल ये शब्द खूब गूंज रहे हैं। मायानगरी को यह शहर शुरु से लुभाता रहा है पर अब तो बालीवुड मानो इसका मुरीद हो गया है। फेमस फिल्म स्टार हों या टीवी के नामचीन कलाकार- जबलपुर सभी को अपनी आेर आकर्षित कर रहा है। हाल ही में कई फिल्म राइटर्स, डायरेक्टर्स और शहर में विजिट कर चुके हैं। शहर के आसपास बसा आदिवासी क्षेत्र और आदिवासियों के रिच कल्चर पर उनका फोकस है। इसके लिए वे लगातार इन क्षेत्रों में जाकर विजिट कर रहे हैं, पिक्चर्स क्लिक कर रहे हैं और शूटिंग के लिए स्थानीय कलाकारों का ऑडिशन भी ले रहे हैं।
अटैक्ट हो रहे आर्टिस्ट
शहर जबलपुर यानि आस-पास की प्राकृतिक सुंदरता में रचा-बसा पुराना शहर। गोंडवाना लैंड का एक हिस्सा, जिसको सिंधु घाटी सभ्यता से भी प्राचीन पहाडि़यों की गोद ने आज भी सहेज रखा है। जहां कभी डायनासोर भी थे। मां नर्मदा के आंचल में बसी ग्रामीण और आदिवासी संस्कृति जहां रिसर्चर्स को अपनी ओर खींचती रही है। यही कल्चर अब फिल्म-टेलिविजनवालों को भी अटैक्ट कर रहा है।
संगमरमरी सौंदर्य ने किया अभिभूत
जबलपुर को विश्वविख्यात बनानेवाले भेड़ाघाट की संगमरमरी वादियों में कई बड़ी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। यहां अब तक जिस देश में गंगा बहती है, प्रान जाए पर वचन न जाए, बॉबी, अशोक दी ग्रेट, मैरिड टू अमेरिका, मछली जल की रानी है, मोहनजोदाड़ो जैसी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। वहीं टीवी सीरियल्स महाभारत, खुशियों की गुल्लक आशी के कुछ सीन्स भी फिल्माए जा चुके हैं।
जो आया मुग्ध हो गया
पिछले दिनों शहर में आए एडिटर/डायरेक्टर राहुल तिवारी अपनी अपकमिंग फिल्म अमेरिका कहां हैं, हलाला/तीन तलाक की शूटिंग लोकेशन्स देख गए हैं। वहीं राइटर/डायरेक्टर अर्पणा सिंह भी रीजनल स्टोरीज लिखने शहर में ही आयीं हैं। ताकि उन्हें फिल्मों की स्क्रिप्ट के लिए सही एटमॉस्फीयर मिल सके।
मंडला है टार्गेट
मंडला, शहर से महज १०० किमी दूर है। राजगौंड और अन्य प्रमुख आदिवासी जातियां यहां निवास करती हैं। जिनकी संस्कृति की अपनी ही कहानी है। इन दिनों मानव राज सिंह मंडला की लोकेशन्स पर काम कर रहे हैं। जो यहां के गौंड आदिवासियों की शिक्षा पर आधारित फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। इनकी टीम स्थानीय कलाकारों और कल्चर को भी प्रमोट करने प्रयास कर रही है।
अट्रैक्शन के खास प्वाइंट
- नर्मदा वैली
- ट्राइब्स रिच कल्चर
- बायोडायवर्सिटी
- आसान परिवहन
- प्रतिभाओं की भरमार
Published on:
04 Nov 2017 10:22 am
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